खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली...खुशदीप



मास्टर ने मक्खन के बेटे गुल्ली को बुलाकर मुहावरे की खाली जगह भरने को कहा...

नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली ..... को चली

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गुल्ली ने मुहावरा पूरा किया...

नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली.. टेढ़ी-मेढ़ी.. चली

ये सुनकर मास्टर ने गुल्ली के झन्नाटेदार जड़ा...नालायक इतना आसान सा मुहावरा भी नहीं आता...
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गुल्ली...मास्टर जी ये तो आपका लिहाज़ कर रहा हूं क्योंकि आप मेरे मास्टर हो...वरना बिल्ली नौ सौ चूहे खाकर चल तो क्या  हिल भी नहीं सकती, मैंने तो फिर भी टेढ़ी-मेढ़ी चला दी...

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बहादुरी की हद...खुशदीप




मक्खन से ज़्यादा बहादुर कौन हो सकता है...

मक्खन पूरी तरह टुन होकर देर रात को घर लौटा...
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उसकी मां झाडू लेकर दरवाज़े पर इंतज़ार कर रही थी...

मक्खन ये देखकर बोला...
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कि गल ए बेबे!!!... हुणे तक सफ़ाई नहीं होई...
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शादी क्या चीज़ होती है...खुशदीप




एक साइंटिस्ट ने, शादी क्या चीज़ होती है, ये समझने के लिए शादी कर ली...

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और शादी के बाद...

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...वो अपने आखिरी दम तक ये नहीं समझ पाया कि साइंस किस बला का नाम होता है...
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विवाहित पुरुषों सावधान...खुशदीप

जो तुमको हो पसंद वही बात कहेंगे,
तुम दिन को कहो अगर रात तो रात कहेंगे...

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जब भी ये गाना कहीं बजता सुनाई दे तो सारे विवाहित पुरुष अपनी जगह पर अनिवार्य रुप से खड़े हो जाए...




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ये उनके लिए कॉमन एंथम घोषित कर दिया गया है...
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"प्राणनाथ" और "चरणों की दासी"...खुशदीप



शादी के दिन मक्खनी पति मक्खन से बोली...
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आप हो मेरे "प्राणनाथ" और मैं हूं आपके "चरणों की दासी"...

शादी के कुछ महीने बाद...
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मक्खन हो गया "चरणदास" और मक्खनी हो गई मक्खन के "प्राणों की प्यासी"....

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http://mrlaughter.deshnama.com/2011/11/whiskey-peg-rs-5-only.html
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क्रिएटिविटी हो तो मक्खन जैसी...खुशदीप

मक्खन ने अपनी गर्ल फ्रैंड का फोन नंबर अपने मोबाइल पर सेव किया तो टाइप किया..

" LOW BATTERY"...




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अब जब  गर्ल फ्रैंड कॉल करती है और मक्खन मोबाइल के पास नहीं होता और उसकी पत्नी मक्खनी फोन उठाती है...

" LOW BATTERY" लिखा देखकर वो कॉल रिसीव करने की जगह चार्जिंग पर लगा देती है...
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मक्खन बोला ढक्कन से...झल्ला है क्या...खुशदीप



मक्खन और ढक्कन आठवीं में दूसरी बार फेल हो गए...

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ढक्कन...यार बेइज्ज़ती बर्दाश्त नहीं होती, चल सुसाइड कर लेते हैं...

मक्खन...झल्ला है क्या,
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अगले जन्म में फिर नर्सरी से शुरू करना पड़ेगा...


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Why post-men are only men ?
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मक्खन की यमदूत ने सुन ली...खुशदीप

मक्खन दुखी बैठा था...

बोला...ये भी कोई ज़िंदगी है...ऐसी ज़िंदगी से तो मौत अच्छी...
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यमदूत ने मक्खन की बात सुन ली और फौरन उसे यमलोक ले जाने के लिए आ गया..


यमदूत...चल मेरे साथ चल, अब तेरा इस दुनिया के लफ़ड़ों से छुटकारा हुआ..

मक्खन ये सुन कर बोला...
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लो बताओ, अब दुखी आदमी मज़ाक भी नहीं कर सकता...

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Recall of a promise on wedding night...

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गज़ल और लेक्चर का अंतर...खुशदीप

एक पति के लिए गज़ल और लेक्चर का अंतर...



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जब दूसरों की पत्नियां कुछ भी बोलें तो उनका हर शब्द गज़ल होता है...


जब अपनी पत्नी बोले तो वो लेक्चर होता है...

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important praise for husband....
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मक्खन की तलब और माचिस...खुशदीप

मक्खन के पास सिगरेट तो थी, माचिस नहीं थी...

बिजली भी नहीं आ रही थी...मक्खन माचिस ढूंढ कर थक गया लेकिन माचिस नहीं मिली...

बेचारा क्या करता...

मन  को  किसी तरह मना कर और....

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मोमबत्ती बुझा कर सो गया...


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पति, पत्नी और बॉस...खुशदीप

एक महिला पति के बॉस के साथ फिल्म देखने गई...
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शो के दौरान ही महिला के मोबाइल की रिंग बजी...

महिला...यस...ओके...फाइन...लव यू हनी...बॉय...

महिला बॉस की ओर मुड़ी और हंस कर बोली...

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कमीना कह रहा है कि वो तुम्हारे साथ किसी इम्पोर्टेंट मीटिंग में है...

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23-year-young to 50-year-old within days


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मक्खन के हाथों में जाम...खुशदीप

मक्खन आज शायरी के मूड में है...



एक बेवफ़ा की याद में हाथों में जाम उठा लिया...
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फिर लगाया ब्रेड पे और फटाफट खा लिया...




नोट- सारे फुके हुए आशिक बेवड़े ही नहीं होते, कुछ भुक्खड़ भी होते हैं....
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मक्खन की दीवाली...खुशदीप

मक्खनी मक्खन से... क्या जी आपने बोला था कि बिना रीज़न दारू को हाथ भी नहीं लगाऊंगा...फिर
आज कौन सी ऐसी वजह है जो बोतल खोले बैठे हो..................................................

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मक्खन... भागवान तू रही भोली की भोली...इतना भी नहीं समझ पाई...दीवाली सर पे आ गई है...

मक्खनी... तो...

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मक्खन...राकेट छोड़ने के लिए वक्त पर बोतल किससे मांगता फिरूंगा...


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दशहरा स्पेशल...रावण का यूएसपी...खुशदीप



क्या आप जानते हैं कि आज अगर रावण जिंदा होता तो अच्छे अच्छे मैनेजमेंट गुरुओं की छुट्टी कर देता...

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कम्पीटिशन के इस गलाकाट दौर में रावण की प्रतिभा के आगे कोई नही टिकता...

वो कैसे भला...

रावण के पास एक ऐसी विशिष्टता थी जो भगवान राम के पास भी नहीं थी...

रावण दशानन होने की वजह से....

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 अकेले ही एक ही वक्त में नौ लोगों से ग्रुप डिस्कशन कर सकता था...
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ओ चन्नी कित्थे उड गया...खुशदीप



कॉलेज के चार पंजाबी मुंडे एक ही बाइक पर हवा से बातें करते जा रहे थे...

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ट्रैफिक वाले ने पीछा करके बाइक को रोक लिया...

बोला...क्या तुम्हे पता नहीं है कि बाइक पर दो से ज्यादा लोगों का बैठना मना है...और तुम चार-चार बैठ कर हवा हवाई हो रहे हो...

ये सुनकर बाइक चलाने वाला पीछे देखकर बोला...
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ओ...कंजरों...पंजवा (पांचवां) चन्नी कित्थे उड गया...

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पठान का इंटरव्यू...खुशदीप



एक पठान साहब इंटरव्यू देने के लिए गए...

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इंटरव्यू लेने वाले ने पहला सवाल पूछा...आबू धाबी कहां हैं...
पठान ने जवाब दिया...

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वल्लाह जिस कब्रिस्तान में हमारा अम्मी दाबी, वहीं थोड़ा दूर पर अब्बू दाबी...
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पेड़ के पीछे 'संस्कृति'...खुशदीप



एक लड़का गर्ल-फ्रैंड के साथ पार्क में बेंच पर बैठा था...

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सैर पर निकले एक बुज़ुर्ग ने ये नज़ारा देखा तो बोले बिना नहीं रह सके...

बेटे, क्या यही हमारी 'संस्कृति' है...

लड़का...नहीं अंकल ये तो 'रीति' है,

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आप उस पेड़ के पीछे चेक करें...
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मक्खन को गुस्सा क्यों आता है...खुशदीप



मक्खन ट्रेन पर यात्रा के लिए निकला...

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ट्रेन पर चढ़ा...वहां चेतावनी लिखी हुई थी...

बिना टिकट यात्रा करने वाले होशियार !

मक्खन....वाह वो होशियार...

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और हम टिकट लेने वाले क्या हैं...उल्लू के पट्ठे !...
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गाली की परिभाषा...खुशदीप


दिल्ली के कालेज स्टूडेंट्स गालियों के लिए बहुत बदनाम है...डेहली बैली में आमिर ख़ान इसका मुज़ाहिरा कर भी चुके हैं...लेकिन हिंदी दिवस पर भाषा के विकृत होने पर एक संस्था ने सेमिनार कराया...वहां गालियों का मुद्दा भी उठा...
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एक सज्जन ने पूछा...आखिर गाली की परिभाषा क्या है...इसका जवाब एक छात्र ने इस तरह दिया...


क्रोध की परिस्थिति में मुखारबिंदु से निकला अशुद्ध और असंसदीय शब्दों का समुच्चय, जिनके प्रस्फुटन के बाद ह्दय को असीम शांति का अनुभव होता है...
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गुल्ली को हुआ बर्ड-फ्लू...खुशदीप



टीचर नाराज़ होकर गुल्ली से....इतने दिन से कहां थे, स्कूल क्यों नहीं आ रहे थे...

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गुल्ली... मैडम जी, मुझे बर्ड-फ्लू हो गया था...

टीचर...बर्ड फ्लू...ये तो बर्डस को ही होता है...

गुल्ली...

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मैडम जी, आपने मुझे इनसान रहने ही कहां दिया है...रोज़ स्कूल आने पर आप मुझे मुर्गा ही तो बनाती रहती हो....
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मक्खनी ने पूछा मक्खन से...खुशदीप





मक्खनी प्यार से मक्खन से बोलते हुए...

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सुनो जी डॉक्टर ने मुझे एक महीना आराम के लिए कहा है...साथ ही हवा पानी बदलने के लिए स्वित्ज़रलैंड या पेरिस जाने की सलाह दी है...हम कहाँ जाएंगे....

मक्खन ने पलक झपकते ही जवाब दिया...

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दूसरे डॉक्टर के पास....
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मक्खन, चाइनीज़ और अमेरिकन...खुशदीप




मक्खन एक चाइनीज़ से....क्या तुम अमेरिकन हो...

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चाइनीज़...नहीं मैं चाइनीज़ हूं...

मक्खन...नहीं तुम अमेरिकन हो...

चाइनीज़...नहीं, नहीं मैं चाइनीज़ हूं...

मक्खन...नहीं मुझे पता है, तुम अमेरिकन हो...

चाइनीज़ गुस्से से....हां मैं अमेरिकन हूं...बस...

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मक्खन...शक्ल से तो बिल्कुल चाइनीज़ लगते हो...
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मुराद पूरी करने वाला कुआं...खुशदीप



कुएं की महत्ता सुनकर एक पति-पत्नी भी वहां गए...

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पति ने कुएं पर झुककर पांच का सिक्का कुएं में डाला और मुराद मांगी...

फिर पत्नी कुएं पर झुकी...कुछ ज़्यादा ही झुकने से उसका बैलेंस बिगड़ गया और वो कुएं में जा गिरी...

पति के मुंह से झट से निकला...

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ओ तेरे की...इट वर्क्स सो फास्ट...
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मक्खन, गुल्ली और चोपड़ा साहब की लड़की...खुशदीप



मक्खन बेटे गुल्ली को डांटते हुए...........................................................................

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बेवकूफ़, जाहिल, चोपड़ा साहब की बेटी को देख, फर्स्ट आई है फर्स्ट...


गुल्ली...डैडी जी, और कितना देखूं उसे....उसे हमेशा देखते रहने की वजह से ही तो फेल हुआ हूं....
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भोजपुरी में "मिशन इंपॉसिबल"...खुशदीप

हॉलीवुड की फिल्म "मिशन इंपॉसिबल" अगर भोजपुरी में बनती तो उसका क्या नाम होता...
 
 
 
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"ई ना हो पाई भय्या"
 
और अगर "मिशन इंपॉसिबल 2 " का भोजपुरी रीमेक भी बनता तो उसका क्या नाम होता...
 
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"हम फिर से कह रही ई ना हो पाई भय्या"
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भगवान को किससे लग रहा है डर...खुशदीप

एक बच्चा भगवान से प्रार्थना कर रहा था....

भगवान, मेरी विनती सुन लो, दो साल से फेल हो रहा हूं, इस साल पास करा दो तो 101 रुपये का प्रसाद चढ़ाऊंगा...................................................................................................................................
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भगवान ने जवाब दिया...श...श....क्या करता है मूर्ख...मुझे भी फंसाएगा क्या...

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अन्ना सुन लेंगे...
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मक्खन द ग्रेट सेल्समैन...खुशदीप

मक्खियां मारते मारते मक्खन आजिज आ गया...सोचा कहीं नौकरी कर ली जाए...लेकिन मक्खन को नौकरी देता कौन...मक्खन ने अपना जैसा ही मुफलिस दुकानदार ढूंढ लिया...दुकान के बारह बजे हुए थे लेकिन उसका मालिक खुद को सेठ कहलाना ही पसंद करता था...दुकान पर ज़्यादा सामान तो कुछ था नहीं...ग्राहक जो मांगते वो मुश्किल से ही दुकान पर निकलता...अब ऐसे में मक्खन को ज़्यादातर ग्राहकों को खाली हाथ ही लौटाना पड़ता...



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एक दो दिन कंगाल सेठ ये देखता रहा...फिर उसने मक्खन को बुला कर समझाया...अच्छा सेल्समैन वो होता है जो ग्राहक को ज़रूरत हो या न हो कुछ न कुछ बेच ही देता है...खाली हाथ दुकान से नहीं लौटने देता...

मक्खन ने सेठ की ये नसीहत गिरह से बांध ली...और ग्राहक का इंतज़ार करने लगा...मुश्किल से एक ग्राहक आया...

ग्राहक...क्या टॉयलेट पेपर मिलेंगे...

मक्खन....टॉयलेट पेपर तो आज ही खत्म हुए हैं...लेकिन मेरे पास उससे भी बेहतर चीज़ है...दे दूं क्या...

ग्राहक....वो क्या है भला...

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मक्खन.... रेगमार (Sand-Paper)
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मक्खन का फ़ायदा...खुशदीप

 
 
मक्खन का फ़ायदा...
 
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मक्खन मक्खनी से...तुझसे शादी करके मुझे एक बहुत बड़ा फ़ायदा हुआ है...मैं सीधे स्वर्ग जाऊंगा...

मक्खनी खुश हो के...रहने दो मेरी इतनी तारीफ भी न करो...स्वर्ग कैसे जाओगे भला...

मक्खन...स्वर्ग ही तो जाऊंगा क्योंकि मेरे सारे पिछले जन्मों के पापों की सज़ा तो धरती पर इसी जन्म में मिल गई...तुझ से शादी करके...
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भाभी से ख़फ़ा मक्खन...खुशदीप

मक्खन गुस्से में लाल-पीला हो रहा था..

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भाई के घर जाकर उसने अपनी भाभी को बहुत बुरा-भला कहना शुरू कर दिया...
सबने रोका लेकिन मक्खन का पारा नीचे आने का नाम ही नहीं ले रहा था...
ढक्कन को पता चला तो वो भी मक्खन का गुस्सा शांत करने के लिए पहुंच गया...
ढक्कन मक्खन को कोने में ले जाकर बोला...आखिर बता तो सही तुझे भाभी से गुस्सा किस बात का है...
मक्खन...क्या बताऊं...आजकल जिस किसी दोस्त को भी फोन पर बात करते देख कर पूछता हूं कि किससे बात कर रहा है, तो सभी का एक ही जवाब होता है...

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तेरी भाभी से....
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गर्लफ्रैंड की मक्खन से डिमांड...खुशदीप






मक्खन से गर्लफ्रैंड ने आइसक्रीम खिलाने की डिमांड की..................................................

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मक्खन आइसक्रीम खरीद लाया...

गर्लफ्रैंड ने कहा...थैंक यू...

मक्खन...सिर्फ थैंक यू...

गर्लफ्रैंड...मुझे पता है तुम क्या चाहते हो...किस न...

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मक्खन...चुप कर भूखी...जल्दी से आधी आइसक्रीम मुझे दे...
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लवगुरु मक्खन का फंडा...खुशदीप


लवगुरु मक्खन का फंडा..................................................................................................................................................................................................................................................................................




ढक्कन से मक्खन...लड़की फंसानी आती है...

ढक्कन...नहीं आती गुरु...

मक्खन...तो सीख, पहले कागज़ का एक जहाज़ बना...फिर उसे क्लास में उड़ा...

ढक्कन...क्या बात कर रहा है...

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मक्खन...जब मैडम पूछे किसने की ये हरकत तो बस झट से लड़की का नाम लगा दे...

बस फंस गई लड़की...
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इतनी सी बात पर क्यों बुला लिया...खुशदीप



राम और रावण में भीषण युद्ध चल रहा था...

देखने वाले हर शख्स की सांसें रुकी हुई थीं...

तभी अचानक रावण की नज़र राम के पीछे खड़े एक शख्स पर पड़ी जो मंद मंद मुस्कुरा रहा था...

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रावण एकदम से युद्ध छोड़कर खड़ा हो गया और बोला...चलो हो गया, मैं चलता हूं...

राम भी हैरान, पूछा...आखिर हुआ क्या...

रावण...कुछ नहीं, जाने दो, बस यूहीं...

राम...अरे बताओ तो सही क्या बात है...

रावण...इतनी छोटी सी बात पर 'रजनीकांत' को बुलाने की क्या ज़रूरत थी...
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मक्खन का दर्द...Khushdeep

मक्खन बस पर चढ़ने लगा...

ऊपर से आवाज़ आई...इस बस पर मत चढ़, ये खाई में गिर जाएगी...

मक्खन को खटका हुआ, बस छोड़कर रेलवे स्टेशन पहुंचा...ट्रेन पर चढ़ने लगा...

ऊपर से फिर आवाज़ आई...इस ट्रेन पर मत चढ़, ये दूसरी ट्रेन से भिड़ जाएगी...

मरता क्या न करता, मक्खन एयरपोर्ट पहुंच गया...प्लेन पर चढ़ने लगा...

फिर ऊपर से आवाज़... इस प्लेन पर मत चढ़...ये समुद्र में क्रैश....

अभी ऊपर वाले की आवाज़ पूरी भी नहीं हुई थी कि मक्खन ने भन्ना कर पूछा....ओए तू है कौण....

ऊपर से आवाज़...मैं भगवान हूं...

मक्खन....ते ओस दिन कित्थे सुत्ता होया सी, जिस दिन मैं घोड़ी चढण लगया सी...
(तो उस दिन कहां सोया हुआ था जिस दिन मैं घोड़ी चढ़ने लगा था)


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मक्खन की मासूमियत...खुशदीप

आप सब जानते ही हैं कि मक्खन कितना मासूम है...अगर किसी को अब भी शक है तो आज जो किस्सा सुनाने जा रहा हूं, उससे सबको पक्का यकीन हो जाएगा...आगे से फिर कोई मक्खन की मासूमियत के साथ समझदारी पर भी उंगली नहीं उठाएगा....

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पार्टी से टुन लौट रहे मक्खन ने घर पर मक्खनी को फोन किया...

घर नहीं आ सकता, गाड़ी का स्टीयेरिंग, गियर, ब्रेक सब चोरी हो गया है...



एक घंटे बाद...

मक्खन का फिर मक्खनी को फोन...---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

आ रहा हूं, गलती से गाड़ी की पिछली सीट पर बैठा हुआ था...
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गर्लफ्रेंड, सिंधी और सयानापन...खुशदीप



व्यापार में सिंधी समुदाय का कोई सानी नहीं होता...कम से कम लागत में ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने की कला में ये माहिर होते हैं...लेकिन कारोबार के इसी सेंस का अगर प्यार में भी इस्तेमाल किया जाने लगे तो क्या नतीजा सामने आता है ये सिंधी बाप-बेटे की बातचीत से जानिए....

बाप...बेटा गर्लफ्रेंड के साथ घूमने गयो थे, पैसा-वैसा जादा तो खर्चा नहीं की नी..

बेटा...नहीं बापू जी, सिर्फ ढाई सौ रुपये...

बाप आश्चर्य से...ढाई...सौ....रु.....प....य्ययययययये....

बेटा...क्या करता बापू जी, गर्लफ्रेंड के पास थे ही सिर्फ ढाई सौ रुपये...

बाप....जय झूले लाल, जय झूले लाल...
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मक्खन और एमबीए...खुशदीप



मक्खन एक दिन पेड़ की डाल पर चढ़ा हुआ था...
इधर से उधर होता मक्खन किसी कंपनी के सीईओ की तरह हाव-भाव दिखा रहा था...
कभी किसी को इंस्ट्रक्शन देता...
कभी मोबाइल पर किसी को डांटता...
घंटों ये नज़ारा चलता रहा...
फिर मक्खन के दोस्त ढक्कन ने ही सारी बात साफ की....
दरअसल मक्खन की बड़ी इच्छा थी कि वो भी आईआईएम, अहमदाबाद से एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद लाखों की सेलरी का पैकेज ले...
लेकिन एमबीए का एन्ट्रेस पास करना कोई खालाजी का घर नहीं था...
मक्खन जी लाख कोशिश करने के बाद भी एन्ट्रेस टेस्ट पास नहीं कर पाए...
फिर क्या था बचा-खुचा जो दिमाग था वो भी हिल गया....
और...
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मक्खन जी बगैर एमबीए हुए ही अपने को ब्रांच मैनेजर समझने लगे....
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आज जट दा मुजरा देखण दा मन है...Khushdeep

चूहा व्हिस्की के ड्रम में गिर गया...बाहर निकला तो बिल्ली को सोए देखा...चूहा फटाक से बिल्ली को लात मार कर बोला- उठ कंजरिए, आज जट दा मुजरा देखण दा मन है...


हमारी बात ही कुछ और है....
एक बार चूहों की सभा चल रही थी...चूहों का बॉस बीच में शानदार कुर्सी पर बैठा सिगरेट के कश लगाता हुआ धुएं के छल्ले उड़ा रहा था...आसपास चमचे चूहे घेरा लगाए हुए उसे बड़े गौर से सुन रहे थे...तभी वहां बिल्ली आ गई...सारे चमचे चूहे बिल्ली को देखते ही सिर पर पैर रखकर चंपत हो गए...लेकिन बॉस चूहा टस से मस भी नहीं हुआ...

बिल्ली को सामने देखकर चूहे ने भागने की जगह सिगरेट का बड़ा सा कश लेकर धुंआ बिल्ली के मुंह पर ही छोड़ दिया...बिल्ली चूहे की ये हरकत देखकर मुस्कुराई और बोली...क्यों तुझे अपनी मौत से डर नहीं लगता...

चूहा उसी अंदाज़ में कश लेता हुआ बोला...चल चल अपना काम कर, हम रेड एंड व्हाइट पीने वालों की बात ही कुछ और है....



चूहा गरजा, भागी बिल्ली

एक बार एक मुखिया चूहा अपने लंबे चौड़े कुनबे के साथ सड़क पर कतार लगा कर चला जा रहा था....तभी सामने से बिल्ली आती दिखी...मुखिया चूहे ने कुनबे को हिदायत दी...कोई कहीं नहीं भागेगा...

तब तक बिल्ली सिर पर आ गई...बिल्ली के पास आते ही मुखिया चूहे ने भौंकने के अंदाज़ में कहा...भौं..भौं..

बिल्ली ये सुनकर भाग गई...चूहे का सारा कुनबा ताली बजाने लगा...

मुखिया चूहे ने छाती चौड़ी कर कुनबे से कहा...देखा फॉरेन लैंग्वेज सीखने का कमाल...
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निखट्टू बेटा, लेकिन बाप खुश, कैसे भला...खुशदीप



दो निखट्टू लेकिन मस्तमौला लड़के पार्क में बैठे बातें कर रहे थे...तभी एक लड़का बोला....यार आजकल बाप ने बड़ा परेशान कर रखा है...दिन भर ताने देता रहता है...न काम का न काज का , ढाई मन अनाज का...क्या करूं यार घर में एक मिनट बैठना भी हराम कर रखा है...

इस पर दूसरा वाला लड़का बोला...यार मेरा बाप तो मुझसे बड़ा खुश है...

पहला वाला लड़का हैरानी से बोला...भला वो कैसे...

इस पर दूसरा लड़का बोला...यार मैं सुबह अंधेरे मुंह उठकर ही गुलेल लेकर निकल जाता हूं...और रोज़ नई कॉलोनी में जाकर शीशे तोड़ आता हूं...

इस पर पहले वाले लड़के ने टोका...तो फिर तेरा बाप कैसे खुश हो जाता है...

दूसरे वाले ने कहा...समझा कर यार, मेरे बाप का ग्लासवेयर का शोरूम है...सब लोग नए शीशे खरीदने मेरे बाप की दुकान पर ही आते हैं...इससे उसका धंधा चोखा चल रहा है...वो भी खुश, मैं भी खुश...

ये सुनकर पहले वाला लड़का ठंडी सांस लेकर रोने लगा...

दूसरे वाले ने कहा...तू रो क्यों रहा है...तू भी अपने बाप का धंधा मुझे बता...फिर मैं भी तुझे कोई तरकीब बता देता हूं...

ये सुनकर पहले वाला लड़का और ज़ोर से रोते हुए कहने लगा...रहने दे यार तू भी मेरी कोई मदद नहीं कर सकता...

दूसरे वाले लड़के ने धीरज बंधाते हुए कहा...अरे तू मुझे नहीं जानता...मेरे पास हर चीज़ का तोड़ है, तू बस मुझे अपने बाप का धंधा बता...

इस पर पहले वाला लड़का हिचकी लेते हुए धीरे से बोला....मेरे बाप का मैट्रिनिटी होम है...
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मक्खन ने उड़ाया Atlantis...Khushdeep



एक बार नासा (नशा नहीं अमेरिका का स्पेस शटल उड़ाने वाला नासा) वाले परेशान हो गए...अटलांटिस स्पेस शटल उड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था...साइंसदानों ने अक्ल के लाख घोड़े दौड़ा लिए पर अटलांटिस टस से मस होने को तैयार नहीं...झक मार कर दुनिया भर के अखबारों में ऐलान कर दिया कि जो भी इस काम में मदद करेगा उसे लाखों डॉलर ईनाम में दिए जाएंगे...इस ऐलान पर अपने मक्खन की भी नज़र पड़ गई...झट से एंबेसी वालों को फोन लगा दिया...मैं उड़ा सकता हूं अटलांटिस...

लो जी...आनन फानन में सारे अरेंजमेट कर मक्खन जी को फ्लोरिडा में नासा के हेडक्वार्टर पहुचा दिया गया...साइंसदान मक्खन को अटलांटिस के मुआयने के लिए ले गए...मक्खन ने इंस्पेक्शन के बाद इंस्ट्र्क्शन दी....अटलांटिस को थोड़ा बाईं और झुकाओ...फिर कहा...अब इसे दाईं ओर झुकाओ...बस अब सीधा खड़ा कर दो और स्टार्ट करो....

कंट्रोल रूम ने मक्खन के आदेश का पालन किया...ये क्या...अटलांटिस स्टार्ट हुआ और आसमान में ये जा और वो जा....हर तरफ तालियां गूंज उठी....मक्खन जी हीरो बन गए..व्हाइट हाउस में डिनर के लिए मक्खन जी को बुलाया गया...वहां अमेरिकी प्रेसीडेंट ने पूछ ही लिया...मक्खन जी हमारी पूरी साइंस फेल हो गई...आखिर आपने कैसे अटलांटिस को उड़ा दिया....मक्खन का जवाब था...ओ नहीं जी कमाल-वमाल कुछ नहीं...मेरा बीस साल पुराना लैम्ब्रेटा स्कूटर है...जब स्टार्ट नहीं होता तो ऐसा ही उसे टेढ़ा करता हूं...और फिर वो स्टार्ट हो जाता है....
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गुल्ली की गुगली...खुशदीप



गुल्ली की सोहबत कुछ गलत दोस्तों से हो गई...गली में उनके साथ गुल्ली महाराज ने फक्कड़ तौलने (गालियां देना) सीख लिए...एक दिन गुल्ली बाहर खेल कर घर वापस आया और अपनी टॉय ट्रेन लेकर बैठ गया...अब ट्रेन चक्कर काटने लगी...और गुल्ली रेलवे स्टेशन पर एनाउंसर की तरह एनाउंसमेंट करने लगा...

ये ट्रेन दिल्ली से इलाहाबाद जा रही है...जिन उल्लू के पठ्ठों को इसमें बैठना है, बैठ जाएं...बाकी अपने घर जाएं...

गुल्ली का ये एनाउंसमेंट तीन-चार बार चला तो मक्खन का ध्यान उसकी और गया...गुल्ली के मुखारबिंद से अपवचन सुनकर मक्खन के अंदर का पिता जाग गया...साथ ही सोया शेर भी....मक्खन ने गुल्ली का कान पकड़ा और सीधे बेडरूम में ले गया...अंदर से दरवाज़ा बंद कर गुल्ली की खूब खबर ली...ठुकाई के साथ समझाया भी...दूसरों के लिए इस तरह की गंदी बात आगे से जुबान पर कभी नहीं लाना...नहीं तो ज़ुबान काट लूंगा...

एक घंटा तक क्लास लेने के बाद मक्खन बाहर आ गया...थोड़ी देर बाद गुल्ली भी बाहर आ गया...अब गुल्ली ठहरा गुल्ली...मक्खन का पुतर...चिकना घड़ा...अपनी टॉय ट्रेन लेकर फिर शुरू हो गया...साथ ही एनाउंसमेंट भी होने लगा...

ये ट्रेन दिल्ली से इलाहाबाद जा रही है...जिन भाईसाहब को इसमें बैठना है जल्दी से बैठ जाएं, क्योंकि ये ट्रेन पहले ही एक उल्लू के पठ्ठे की वजह से एक घंटा लेट हो चुकी है...

(नोट किया जाए- अब गुल्ली ने किसी दूसरे या बाहर वाले के लिए अपशब्द का इस्तेमाल नहीं किया)

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Funniest joke- Makkhan, Dakkan and Gabbar

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उम्र न पूछो मैडम की...खुशदीप



कहते हैं किसी से उम्र नहीं पूछनी चहिये,...आजकल महिलाएं तो महिलाएं, पुरुष भी असली  उम्र बताने से कतराते हैं...

पेज थ्री टाइप फैशन डिजाइनर एक मोहतरमा मेकअप से सराबोर होकर रियल्टी टीवी के एक चैट शो में पहुंची...साथ में जवान बेटी...शो की होस्ट ने एक सवाल में फैशन डिजाइनर मोहतरमा की उम्र पूछ ली...

अब पूरा देश शो देख रहा था...सही उम्र कैसे बता दी जाए 45...नो नो...इट्स 40...एक्चुअली 35 है...वन मोर करेक्शन 30...फाइनली 25...

तभी साथ जवान बेटी ने धीरे से मां के कान में कहा...मॉम, उम्र जितनी मर्जी कम बताओ, बस अपनी और मेरी उम्र के बीच नौ महीने का फ़र्क ज़रूर रख लेना...


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License to rupture in laughter...हँसना मना है...Khushdeep
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मक्खन का भजन...खुशदीप

मक्खन के पड़ोस में एक दक्षिण भारतीय परिवार रहने के लिए आ गया...नया पड़ोसी मेलजोल बढ़ाने के नाते मक्खन के घर आया और बोला...अइयो, कल अमारे घर भोजन होता जी...आप को पूरा फैमिली के साथ आने को मांगता जी...

मक्खन ने भी अच्छे पड़ोसी का धर्म निभाते हुए न्यौता स्वीकार कर लिया...अगले दिन मक्खन, पत्नी मक्खनी और बेटा गुल्ली सज-धज कर नये प़ड़ोसी के घर पहुंच गए...वहां पूजा-पाठ चल रहा था...मक्खन का परिवार भी साथ बैठ गया...दो घंटे तक पूजा-पाठ चलता रहा...लेकिन मक्खन के दिमाग में दक्षिण भारतीय व्यजंन ही चक्कर काट रहे थे...



पूजा खत्म होने के बाद दक्षिण भारतीय पड़ोसी मक्खन के पास आया और बोला...अइयो...अमको बोत अच्छा लगा जी आप का पूरा फैमिली हमारे साथ भोजन में हिस्सा लिया...नये पड़ोसी ने ये कहने के बाद भोजन के प्रसाद के तौर पर एक एक बतासा मक्खन, मक्खनी और गुल्ली के हाथ पर धर दिया...

अब मक्खन घर लौटते सोच रहा था...भोजन या भजन...
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ललित शर्मा की हाज़िरजवाबी...खुशदीप


एक बार ललित शर्मा भाई मॉर्निंग वॉक पर निकले...किसी सिरफिरे ने सड़क पर केले का छिलका फेंक रखा था...ललित भाई को छिलका दिखा नहीं और जा फिसले...पार्क के पास ही एक गधे महाराज घास पर हाथ साफ कर रहे थे...ललित भाई का बैलेंस बना नहीं और वो गधे के पैरों के पास जा गिरे...वहीं एक सुंदर सी मैडम खड़ी थी...मैडम से हंसी रोकी नहीं गई और चुटकी लेते हुए ललित भाई से बोली...क्यों सुबह-सुबह बड़े भाई के पैर छू रहे हो क्या...ललित भाई भी ठहरे ललित भाई...कपड़े झाड़ते हुए उठ कर मैडम से बड़े अदब से बोले...जी भाभी जी...

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एक कंजूस व्यापारी के दादाजी की मौत हो गई...वो अखबार में शोक विज्ञापन देने के लिए गया...उसने विज्ञापन दिया...दादाजी खत्म....अखबार के स्टॉफ ने कहा...इतना छोटा विज्ञापन हम स्वीकार नहीं करते, कम से कम पांच शब्द विज्ञापन में होने चाहिए...कंजूस व्यापारी ने बिना एक मिनट गंवाए कहा...दादाजी खत्म, व्हील चेयर बिकाऊ...
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जिन्न से भी बड़ा जिन्न...खुशदीप



एक सयाने की जिन्न से दोस्ती थी...एक बार जिन्न कुछ दिन तक सयाने से मिलने नहीं आया...सयाने को फिक्र हो गई...उसने किसी तरह जतन कर जिन्न को बुलाया...

जिन्न आया तो लेकिन बदहवास हालत में...चेहरे से हवाइयां उड़ रही थीं...इस तरह जिस तरह किसी टार्चर रूम से बड़ी मुश्किल से निकल कर आया हो...

सयाने ने पूछा...क्या हुआ जिन्न भाई, तुम दुनिया के होश उड़ाते हो तुम्हारी ये हालत किसने बना दी...

जिन्न बोला....क्या बताऊं सयाने भाई...इस बार मुझे खुद ही मुझसे भी बड़ा जिन्न चिमड़ गया था...बड़ी मुश्किल से उसकी सौ-डेढ़ सौ पोस्ट पढ़ने के बाद जान छुड़ाकर आया हूं...बस डर यही है कि वो ब्लॉगर जिन्न और ताजा पोस्ट लेकर पीछे-पीछे यहां भी न आ धमके...


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बॉस सताए तो ये प्रार्थना करो...खुशदीप



बॉस का सताया एक बंदा ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है...


हे प्रभु,
मुझे इतनी बुद्धि दो,
मैं बॉस के दिमाग को पढ़ सकूं...

मुझे इतना संयम दो,
मैं बॉस के हुक्म झेल सकूं...


पर प्रभु,
मुझे ताकत कभी मत देना,
वरना बॉस मारा जाएगा
कत्ल मेरे सिर आएगा...
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हाथी की सवारी गांठती चींटी...खुशदीप

एक हाथी स्विमिंग पूल में फिसल कर गिर गया...स्विमिंग पूल में जितनी चींटिया थी बाहर भागने लगी...लेकिन एक दिलेर चींटी हाथी के ऊपर ही चढ़ गई...उसकी सहेली ने देखा तो चिल्ला कर बोली...डुबो...डुबो साले को पानी में...स्विमिंग पूल में घुस कर लड़कियों को छेड़ता है....

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गुल्ली स्कूल से आकर मक्खन से बोला....डैडी जी, डैडी जी स्कूल वाले स्विमिंग पूल के लिए डोनेशन मांग रहे हैं...सुबह क्या ले जाऊं...

मक्खन...डोनेशन देना ज़रूरी है तो एक लोटा पानी ले जाना...
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हाईप्रोफाइल कैंडल मार्च की तैयारी...खुशदीप

कैंडल मार्च देश की ज़रूरत बन गया है...सोशलाइट्स के लिए खास तौर पर...इसी बहाने एक झटके में जता दिया जाता है कि देश और समाज के लिए अहम मुद्दों पर दिखाने के लिए उनका आब्लिगेशन कितना स्ट्रॉन्ग होता है...ये व्यंग्य मैंने मुंबई हमले की पहली बरसी पर लिखा था...

"हमको कैंडल लाइट विजिल करना मांगता...आफ्टरऑल 26/11 का फर्स्ट एनिवर्सरी है...हम देश के रिस्पांसिबल सिटीजन है...हमारा भी कुछ मॉरल ड्यूटी बनता है...कैसे पता चलेगा कि हमारा सोशल ऑब्लिगेशन कितना स्ट्रॉन्ग है"...शहर के इलीट क्लब में 25 नवंबर को यही हॉट डिस्कशन था...एक तरफ किटी की टेबल पर विदेशी परफ्यूम में तर-बतर मोहतरमाएं...और दूसरी तरफ बिलियर्डस की टेबल पर शाट लेते हुए जेंटलमैन
...साइड टेबल पर करीने से लाल परी से भरे क्रिस्टल के पैमाने भी सजे हुए हैं...

हां तो यंग मेन एंड यंग लेडीज़ (यहां उम्र जितनी भी हो जाए लेकिन चेहरे पर पैसे की चमक सबको एवरग्रीन यंग रखती है)...क्या प्रपोजल्स है कल के लिए...सोशल फंड से अभी एडवांस पास करा लेते हैं...कल कोई दिक्कत नहीं आएगी...

सबसे पहले मिसेज दारूवाला उठती हैं...मेरे ख्याल से कल इलीट क्लब से सिटी मॉल तक आधे किलोमीटर का कैंडल लाइट मार्च निकाला जाए...हमारे जैसी सेलिब्रटीज़ इसमें हिस्सा लेंगी तो शहर के आम लोगों को इससे अच्छा इन्सपिरेशन मिलेगा...मिसेज दारूवाला की बात खत्म होने से पहले ही क्लैपिंग से क्लब गूंज उठता है...

मिस्टर हाथी तत्काल मिसेज दारूवाला के प्रपोजल को सेकंड करते हैं...हां तो ठीक रहा कल हम सब शाम को पांच बजे क्लब में मिल रहे हैं...पहले वेलकम मेनू सेट कर लिया जाए...हाई टी और जूस के साथ चीज़ सैंडविच और गार्लिक ब्रेड ठीक रहेगी...भई हम सारे ही कलरी-कॉन्शियस है...ऐसा है सब को वॉक करना है तो सब को पाकेट में रखने के लिए ड्राई-फ्रूट्स के पैक दे दिए जाएंगे...एनर्जी का लेवल मेंटेन रहेगा...आपसे एक रिक्वेस्ट है, ड्राई-फ्रूट्स के पैक पाकेट में ही रखिएगा..ओपन करने से आम लोगों में अच्छा मैसेज नहीं जाएगा...

अभी मिस्टर हाथी ने अपनी बात भी पूरी नहीं की थी कि लड़खड़ाते कदमों से मिस्टर पीके माइक के पास आकर बोले...अरे मिस्टर हाथी मरवाएंगे क्या...इतनी लंबी वॉक...वो भी सूखे-सूखे...गला तर करने का भी कोई प्रपोजल होगा या नहीं..इस पर मिस्टर हाथी ने जवाब दिया...मिस्टर पीके...यू भी न...टू मच...बडी़ जल्दी वरी करने लग जाता है...अरे वॉक के बाद सिटी माल के ओपन टेरेस रेस्तरां में डिनर से पहले कॉकटेल का भी अरेजमेंट रख लेते हैं...वैसे कैंडल लाइट मार्च से थोडी दूरी पर एक मोबाइल कार-ओ-बार भी कन्वीनिएंस के लिए साथ-साथ चलेगी...

अभी ये बात चल ही रही थी कि मिस कलरफुल खडी़ हो गईं...मिस्टर सेक्रेट्री हमको आपसे एक शिकायत होता...पिछली बार जेसिका लाल इश्यू पर कैंडल लाइट मार्च निकाला था तो आपने प्रेस के जिन लोगों को इन्वाइट किया था, उन्हें ज़रा भी न्यूज़-सेंस नहीं था...मैंने उस ओकेशन के लिए स्पेशल चेन्नई से कांजीवरम की साड़ी मंगाया था...लेकिन अगले दिन पेज थ्री पर मेरा एक भी फोटोग्राफ नहीं छपा...मेरा दस हज़ार रुपया पानी में चला गया ...इस बार उन्हें पहले से ही अलर्ट कर दीजिएगा कि कल कैंडल लाइट मार्च को कवर करते हुए वैसा सिली मिस्टेक न हो...चाहें तो एंगल वगैरहा सेट करने के लिए एक बार फुल ड्रेस रिहर्सल भी कर लेते हैं...सभी रिस्पेक्टेड लेडीज़ ने मिस कलरफुल की बात को ज़ोरदार क्लैपिंग के साथ एप्रिशिएट किया...

इसके बाद सभी ने आखिरी नोट पर कल के प्रोग्राम की सक्सेस के लिए चीयर्स किया...

(...धन्य है हमारे ये सोशेलाइट्स)

LADY ON THE PHONE AND MAKKHAN....KHUSHDEEP
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फिर टेढ़ा है, पर मेरा है...खुशदीप

मैं स्लॉग ओवर ब्लॉग पर नई पोस्ट के साथ अपने सारे पुराने व्यंग्य भी एक ही जगह लाने का प्रयास कर रहा हूं...ये वाली पोस्ट मैंने  12 Dec 2009  को लिखी थी...इसके बाद भी ब्लॉगवुड से काफ़ी नए पाठक जुड़े...उनकी खिदमत में ही पेश कर रहा हूं...

बुधवार से मन बड़ा खराब चल रहा है...वजह है हमारा बजाज...टेढ़े बजाज का खटारा खटराग...लोगबाग बेशक उसे स्कूटर कहने की गुस्ताखी करते हैं लेकिन हमारे लिए तो वो अश्वराज चेतक से कम नहीं...पिछले 18 साल से जब भी ये चेतक महाराज मुझे सवारी कराते रहे हैं, मुझे यही लगता है कि राणा प्रताप की आत्मा मेरे अंदर आ गई है...वो तो मूंछे नहीं रखी हुई, नहीं तो चेतक की हर उड़ान पर कलफ की तरह ही कड़क हो जाया करती और गाना गाया करती...हमरी ना मानो तो बजजवा से पूछो...(सुन रहे हैं न ललित शर्मा भाई...)

आप पूछेंगे कि ये सुबह-सुबह कौन सा वीत-राग ले बैठा...ओ बजाज जी, तेरे ऐलान ने बड़ा दुख दीना...अब आप कहेंगे...कौन बजाज...अरे वही बजाज जो कल तक बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर दिखाते रहते थे...हमारा बजाज, हमारा बजाज करते रहते थे...इन बजाजों ने बुधवार को ऐलान कर दिया कि स्कूटर कारोबार को पूरी तरह राम-राम करने जा रहे हैं....अब इन बजजवों को कौन याद दिलाए इनके एड के वो जिंगल, जिनमें कस्मे-वादे किए जाते थे कि बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर आज भी और कल भी हमारे साथ रहेगी... देश की दो पीढ़ियां इस जिंगल को गुनगुनाते हुए ही जवानी से सठियाने की दहलीज पर आ गईं और अचानक ये अलविदा-अलविदा के सुर छेड़ने लगे (लगता है इन्हें भी ब्लॉगरी के ताजा जिन्न ने जकड़ लिया है)...

तो जनाब ये बजाज वाले कह रहे हैं कि उनके स्कूटर के सभी जाने-माने मॉडलों पर परदा गिरने की घड़ी आ गई है..कंपनी ने तीन साल पहले ही चेतक मॉडल बनाना बंद कर दिया था...बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज के मुताबिक इस कारोबारी साल के अंत तक कंपनी क्रिस्टल सीरीज के स्कूटर का उत्पादन भी बंद कर देगी...1980 के दशक में 'हमारा बजाज' कर्मशियल्स बनाने वाली ऐड एजेंसी लोवे इंडिया के चेयरमैन आर बाल्की कहते हैं, 'कभी घोड़ागाड़ी का वक्त था, अब मोटरसाइकिल का दौर है... 'भारत बदल रहा है, बुलंद बदल रहा है और बजाज भी...' यानि ये सुसर बाइकवा ज्यादा माइलेज देने के चक्कर में स्कूटर पर भारी पड़ गईं...

अब इन मैनेजमेंट गुरुओं को कौन समझाए, स्कूटर जैसा सुख हम पाएंगे कहां...इन हवा-हवाई बाइकों की गद्दी पर खुद ही अपनी उन (बाइक पर ज्यादातर पीछे वो...ही बैठती हैं) के साथ समा जाएं वो ही बड़ी बात है...बाकी सामान रखने की तो सोचो हीं नहीं...और स्कूटर...जनाब पीछे पत्नी (स्कूटर पर पीछे पत्नियां ही बैठती हैं... वो...नहीं)...बीच में एक बच्चा...आगे हैंडल को पकड़े एक बच्चा...आगे का स्टैंड और डिक्की सामान से ठसाठस...चलाने वाले की टांगों के नीचे दोनों तरफ लटकते सब्जियों के बड़े-बड़े थैले...हम इसी अंदाज़ में अपने चेतक महाराज को 18 साल से दौड़ा रहे हैं...कभी तो रतन टाटा की नज़र हमारे पर भी पड़ेगी...शायद तरस खाकर एक अदद नैनो रानी ही तोहफे में हमें भिजवा दें...अब भले ही बाद में एड में अपनी इस दरियादिली को कितना भी कैश कर ले, हमें कोई ऐतराज नहीं होगा...कसम उड़ानझल्ले की....स्टांप पर लिख कर देने को भी अपुन तैयार है...

हां तो लौटता हूं अपने बजाज पर...नंबर यू पी 15...9743...बच्चे इतने बड़े हो गए हैं कि स्कूटर पर हमारे साथ बैठना छोड़ दिया है...बैठना क्या छोड़ दिया, आगे हैंडल के साथ जब बिटिया खड़ी होती थी तो हमें स्कूटर चलाते हुए सिर्फ उसकी चोटी ही नज़र आती थी...सड़क नहीं...बार-बार यही कहते रहते थे....बेटी सिर थोड़ा नीचे...सिर थोड़ा नीचे...एक दिन झक मार के बिटिया ने ऐलान कर दिया लो अब मैं स्कूटर पर कभी चढ़ूंगी ही नहीं...तो जनाब अब मैं और मेरा बजाज...अक्सर ये बाते किया करते हैं...बाते क्या करते हैं स्कूटर ही मुझे संघर्ष फिल्म के दिलीप कुमार की तरह ताने दिया करता है....एक एक करके सब तो आपका साथ छोड़ कर चले गए...एक मैं ही हूं जो साथ दिेए जा रहा हूं....


ये मेरा स्कूटर नहीं है, नेट से ली गई फोटो है...लेकिन कसम से मेरे वाला भी कंपीटिशन में
इस स्कूटर की हालत से कम नहीं है
साथ भी कितना गजब का दिया है साहब...पत्नी लाख हमें मार्निंग वॉक के फायदे समझाती रहती है लेकिन मजाल है कि हम ब्लॉगिंग का परम सुख छोड़कर सुबह कभी सैर पर निकल जाए...लेकिन ये स्कूटर महाराज...इनके आगे हमारा बस भी नहीं चलता...पहले तो ये स्टार्ट होने का नाम ही नहीं लेते...लाख टेढ़ा-मेढ़ा कर लो पर ये इंजन का मधुर राग तभी सुनाएंगे जब इनकी मर्जी हो...अक्सर हम किक मार-मार कर हलकान होते रहते हैं पर चिकने घड़े की तरह स्कूटर जी पर कोई असर नहीं पड़ता...किक मारते मारते जब तक मुंह से हमारी जीभ को बाहर आए निकला न देख ले...ये शुरू नहीं होते...जीभ देखकर जब इन्हें तसल्ली हो जाती है कि हमने ब्रश के साथ टंग-क्लीनर का भी इस्तेमाल किया है, तभी ये अपने ऊपर हमें सवारी गांठने का मौका देते हैं....हां, पत्नी को पता चले न चले लेकिन हमारे स्कूटर महाराज को हमारे वजन से तड़ाक पता चल जाता है कि आज हमने बाज़ार में कुछ पेट फुलाऊ खाने की चीज़ों पर हाथ साफ किया है....रास्ते में चलते-चलते बंद हो जाते हैं....फिर हमें इन्हें कई किलोमीटर खींचना पड़ता है...और जब स्कूटर महाराज जी को ये भरोसा हो जाता है कि हमने जो खाने में एक्स्ट्रा कलरी हड़पी थीं वो सब हजम हो गई हैं तब अचानक झट से स्टार्ट हो जाते हैं...देखा मेरी सेहत का कितना ख्याल...

एक फायदा और सुनिए...अपने राम कभी स्कूटर में ताला नहीं लगाते...(लगाए कहां से चाबी ही पिछले कई सालों से खोई हुई है)...और दावा है कि स्कूटर को कहीं भी खड़ा कर दे, मजाल है कि कोई चोर उसकी तरफ बुरी नज़र उठा कर देखे...हमारे स्कूटर जी माशाअल्लाह है ही इतनी सुंदर हालत में...इतनी बढ़िया कंडीशन में कि चोर भी आएगा तो स्कूटर पर सौ का नोट इस नोट के साथ रखकर चला जाएगा...अबे साले कभी तो सर्विस करा लिया कर...

तो जनाब ऐसा है मेरा बजाज...बेशक स्कूटर की बॉ़डी टेढ़ी हो गई है...स्टैंड वक्त के थपे़ड़ों को सहते-सहते गल कर गिरने को तैयार है...लेकिन टेढ़ा है तो क्या...है तो मेरा है...अब बजाज खुद ही एंटीक के तौर पर मेरे बजाज के लिए लाखों रुपये भी देने को तैयार हो तो क्या, मैं अपने इस जिगर के टुकड़े को बेचना तो दूर इसकी तस्वीर भी कोई न दूं...


स्लॉग ओवर
एक बार नासा (नशा नहीं अमेरिका का स्पेस शटल उड़ाने वाला नासा) वाले परेशान हो गए...कोलंबिया स्पेस शटल उड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था...साइंसदानों ने अक्ल के लाख घोड़े दौड़ा लिए पर कोलंबिया टस से मस होने को तैयार नहीं...झक मार कर दुनिया भर के अखबारों में ऐलान कर दिया कि जो भी इस काम में मदद करेगा उसे लाखों डॉलर ईनाम में दिए जाएंगे...इस ऐलान पर अपने मक्खन की भी नज़र पड़ गई...झट से एंबेसी वालों को फोन लगा दिया...मैं उड़ा सकता हूं कोलंबिया...

लो जी...आनन फानन में सारे अरेंजमेट कर मक्खन जी को फ्लोरिडा में नासा के हेडक्वार्टर पहुचा दिया गया...साइंसदान मक्खन को कोलंबिया के मुआयने के लिए ले गए...मक्खन ने इंस्पेक्शन के बाद इंस्ट्र्क्शन दी....कोलंबिया को थोड़ा बाईं और झुकाओ...फिर कहा...अब इसे दाईं ओर झुकाओ...बस अब सीधा खड़ा कर दो और स्टार्ट करो....

कंट्रोल रूम ने मक्खन के आदेश का पालन किया...ये क्या...कोलंबिया स्टार्ट हुआ और आसमान में ये जा और वो जा....हर तरफ तालियां गूंज उठी....मक्खन जी हीरो बन गए..व्हाइट हाउस में डिनर के लिए मक्खन जी को बुलाया गया...वहां अमेरिकी प्रेसीडेंट ने पूछ ही लिया...मक्खन जी हमारी पूरी साइंस फेल हो गई...आखिर आपने कैसे कोलंबिया को उड़ा दिया....मक्खन का जवाब था...ओ नहीं जी कमाल-वमाल कुछ नहीं...मेरा बीस साल पुराना लैम्ब्रेटा स्कूटर है...जब स्टार्ट नहीं होता तो ऐसा ही उसे टेढ़ा करता हूं...और फिर वो स्टार्ट हो जाता है....
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Fancy Dress...मक्खन बना चॉक-बार...Khushdeep

मक्खन को एक बार फैंसी ड्रैस कंपीटिशन में हिस्सा लेना था...मक्खन ने पत्नी मक्खनी के सिर ड्रैस लाने की ज़िम्मेदारी छोड़ दी...

मक्खनी सांता क्लाज़ की ड्रैस ले आई...देखते ही मकखन भड़क गया....कभी काला सांता भी देखा है क्या...

मक्खनी क्या करती बेचारी...ड्रैस बदलकर स्नोमैन की ड्रैस ले आई...

मक्खन ने फिर सड़ा सा मुंह बनाकर कहा...स्नोमैन भी कभी काला हो सकता है क्या...

इस बार मक्खनी गई और एक फुटा ले कर आ गई...

मक्खन...अब ये क्या ले आई है...इस फुटे को अपने सिर पर मारूं क्या...
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मक्खनी...नहीं पीछे लगा लो...और कंपीटिशन में चॉक-बार बन कर जाओ....

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बच्चा मिट्टी खाए, दूध वाला पानी मिलाए तो...Khushdeep

1. बच्चा अगर मिट्टी खाता है तो क्या करें...

बच्चे को डाइनिंग टेबल पर आराम से बैठाएं...एक प्लेट में मिट्टी डाले और चम्मच के साथ उसे खाने के लिए पेश करें...साथ ही कहें...बेटा जितनी मर्जी मिट्टी खाओ लेकिन मैनर्स के साथ...फिर देखिए बच्चा मिट्टी के पास कभी फटकेगा भी नहीं....

2. दूध वाला अगर दूध में पानी मिलाता है तो क्या करें...

सुबह दूध वाला आए तो उससे कहिएगा...भईया आज से जो दूध तुम 28 रुपये लीटर देते हो, उस भाव में हम ये दूध नहीं लेंगे...हम तुम्हे एक लीटर दूध के 40 रुपये दिया करेंगे...दूध वाला भैया ये सुनकर थोड़ा हैरान-परेशान होगा...फिर उसकी परेशानी भांपते हुए कहिए...भइया ये फालतू के पैसे इसलिए हैं कि तुम हमारे दूध में मिनरल वाटर मिलाया करो...ये सरकारी नलकों से आने वाले पानी पर हमें कोई भरोसा नहीं है...फिर देखिए अगले दिन से दूध की क्वालिटी...

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मक्खन की बेबे (मां) गुम हो गई...Khushdeep

मक्खन की बेबे (मां) की मौत हो गई...भाईया जी (पिता) पहले ही दुनिया छोड़ कर जा चुके थे...मक्खन का बेबे से बड़ा जुड़ाव था...बेबे के बिना उसे दुनिया ही बेकार लगने लगी...अपने में ही गुमसुम रहने लगा...इसी तरह एक साल बीत गया...मक्खन के जिगरी ढक्कन से मक्खन की ये हालत देखी नहीं जा रही थी...लेकिन करे तो करे भी क्या...

तभी उसे किसी ने बताया कि शहर में कोई सयाना आया हुआ है...ढक्कन ने सोचा मक्खन को सयाने जी के पास ही ले जाता हूं...शायद वो ही उसे ठीक कर दें...मक्खन ने सयाने को अपना दर्द बताया...सयाना भी पहुंची हुई चीज़ था...उसने मक्खन को ठीक करने के लिए एक तरकीब सोची...उसने मक्खन से कहा...बच्चा, तेरी बेबे से पिछले जन्म में अनजाने में कोई बड़ी भूल हो गई थी...इसलिए ऊपर वाले ने बेबे को सजा के तौर पर इस जन्म में श्वान (कुत्ती) बना कर भेज दिया है...लेकिन जल्द ही तेरी बेबे से मुलाकात होगी...इसलिए परेशान मत हो...मक्खन सुन कर मायूस तो बड़ा हुआ लेकिन बेबे से जल्द मिलने की सोच कर ही थोड़ी तसल्ली हुई...बाहर निकले तो ढक्कन उसे खुश करने के लिए जलेबी की दुकान पर ले गया...दोनों जलेबी खा ही रहे थे कि एक कुत्ती वहां आ गई... और जलेबी के लालच में मक्खन को देख कर ज़ोर ज़ोर से पूंछ हिलाने लगी...मक्खन का कुत्ती को देखकर माथा टनका...सयाने जी के बेबे के बारे में बताए शब्द उसके कानों में गूंजने लगे...मक्खन ने जलेबी का एक टुकड़ा डाल दिया...कुत्ती ने झट से टुकड़ा चट कर लिया...और उचक-उचक कर मक्खन की टांगों पर पंजे मारने लगी...मक्खन ने सोचा हो न हो...ये मेरी बेबे ही लगती है...

मक्खन घर की ओर चला तो कुत्ती जी (सॉरी...बेबे) पीछे पीछे...मक्खन का भी मातृसेवा का भाव अब तक पूरी तरह जाग चुका था...बेबे को साथ लेकर ही मक्खन अपने घर में दाखिल हुआ और मक्खनी को आवाज़ दी...सुन ले भई...तूने बेबे को पहले बड़ा दुख दिया था...लेकिन इस बार बेबे जी को कोई तकलीफ हुई तो तेरी खैर नहीं...मक्खनी भी मक्खन के गुस्से की सोच कर डर गई...लो जी बेबे जी की तो अब मौज आ गई...कहां गली-गली नालियों में मुंह मारते फिरना...और कहां एसी वाला बढ़िया बेडरूम...बेबे जी के लिए बढ़िया बेड बिछ गया...बेड पर पसरे रहते और बढ़िया से बढ़िया खाना वहीं आ जाता...
 
मक्खन भी काम पर आते-जाते बेबे जी के कमरे में जाकर मिलना नहीं भूलता...एक दिन मक्खन काम से घर वापस आया तो आदत के मुताबिक बेबे जी के कमरे में गया...लेकिन ये क्या...बेड पर उसे बेबे जी नहीं दिखे....ये देखते ही मक्खन का पारा सातवें आसमान पर...चिल्ला कर मक्खनी को आवाज़ दी....बेबे जी कहां हैं...तूने फिर कोई उलटी सीधी हरकत की होगी...और वो नाराज़ होकर चली गई होंगी...इस पर मक्खनी ने कहा....नाराज़ न होओ जी...ओ आज शामी बेबे जी नू घुमाण लई भाईया जी आ गए सी, ओन्हा नाल ही सैर ते गए ने...(आज शाम को बेबे जी को घुमाने के लिए भाईया जी आ गए थे...उन्हीं के साथ सैर पर गई हैं...)

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Cricket and China...वेरी इंट्रस्टिंग गेम...Khushdeep

एक बार चीन के राष्ट्राध्यक्ष भारत के दौरे पर आए...उन्हीं दिनों में दिल्ली में भारत और पाकिस्तान के बीच टेस्ट मैच चल रहा था...चीन के राष्ट्राध्यक्ष को भारत के प्रधानमंत्री टेस्ट मैच दिखाने ले गए...मैच का पहला ओवर शुरू हुआ...हर बॉल पर चीनी राष्ट्राध्यक्ष को बड़ा मज़ा आ रहा था...

एक ओवर बाद ही छोर बदलने के लिए खिलाड़ी इधर से उधर होने लगे...ये देखकर चीनी राष्ट्राध्यक्ष भी ताली बजाते हुए सीट छोड़ कर उठ खड़े हुए...शिष्टाचारवश भारत के प्रधानमंत्री को भी उठना पड़ा...

चीनी राष्ट्राध्यक्ष ने कहा...वेरी इंट्रस्टिंग गेम...मैं अपने देश में भी इसे शुरू करने को कहूंगा...लेकिन आपको नहीं लगता कि इस गेम को खेलने के लिए वक्त थोड़ा कम रख गया है...सिर्फ पांच मिनट...

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Tipu Sultan vs Tunni Uncle...टीपू सुल्तान कौन था...Khushdeep


मक्खन...गुल्ली पुतर...इधर आ...ज़रा चेक करूं कि स्कूल में क्या पढ़ता है...बता टीपू सुल्तान कौन था...

गुल्ली...पता नहीं...

मक्खन...स्कूल में क्लास में रहा करे तो पता चले न कि टीपू सुल्तान कौन था...

गुल्ली...डैडी जी...टुन्नी अंकल कौन है...पता है...

मक्खन...पता नहीं...वैसे कौन है ये टुन्नी...

गुल्ली...कभी घर में रहा करो तो पता चले न...

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jealousy in humour...नैनो को लगी मारूति 800 की आह...Khushdeep

मारूति  800 अब अतीत की बात हो चली है...लेकिन जब देश में नैनो के आने का बड़ा हो-हल्ला था तो मारूति  800 के सीने पर सांप लौटते थे...ये मारूति 800  की आह लगी कि नैनो को ज़्यादा भाव नहीं मिल रहा...अब देखिए मारूति 800 और नैनो जब पहली बार एक दूसरे से मिली थीं तो क्या हुआ था...

मारुति 800 नई नवेली नैनो से पहली बार मिली...

मारुति ने नैनो पर चुटकी ली...ए री तेरी दोनों आंखें बाहर की ओर क्यों निकली हुई हैं...

नैनो...पहले पीछे तशरीफ रखने वाली जगह पर पूरा इंजन ठुकवा...फिर मुझसे बात करना...देखना आंखें बाहर आती हैं या नहीं...

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