खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

मुर्गी की फिगर

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  • Khushdeep Sehgal
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  • सुबह सुबह एक मुर्गी बेकरी वाले की दुकान पर पहुँच गयी. दुकानदार को 30 रुपये दिए और बोली 6 अंडे दे दो. दुकानदार हैरान-परेशान. फिर हिम्मत करके बोला- मुर्गी बहन तुम तो खुद पूरी दुनिया को अंडे देती हो, फिर तुम्हे अंडे खरीदने की नौबत क्यों आ गयी. ये सुनकर मुर्गी थोडा लज्जाई-शर्माई, फिर बोली- वो दरअसल मेरे मुर्गेजी ने कहा है- क्या तीस रुपये के पीछे अपनी फिगर ख़राब करेगी, जा अंडे खरीद ही ला.

    2 टिप्पणियाँ:

    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

    वाह!
    फिर वर्ड वेरीफिकेशन?

    अरूण साथी ने कहा…

    करारा है जी...आजकल आदमी की बिमारी मुर्गी को लग गई...

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