खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

झूठ बोले, रोबोट काटे...

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  • 12 साल के पप्पूजी को झूठ बोलने की लत लग गई..कुछ भी उलटा-सुलटा किया... झूठ बोला..और जान बचा ली..स्कूल का होमवर्क नहीं किया तो पिताश्री के एक्सीडेंट तक का बहाना बना लिया...टीचर बजाए डांटने के और हमदर्दी जताने लगती...लेकिन धीरे-धीरे पप्पूजी की कलई खुलने लगी और शिकायतें घर तक पहुंचने लगीं..माताश्री और पिताश्री दोनों परेशान...पप्पूजी का करें तो करें क्या...भला हो पिताश्री के एक साइंटिस्ट दोस्त का, उसने माज़रा भांप लिया...साइंटिस्ट साहब ने समाधान सुझाया कि वो ऐसा रोबोट दिला सकते हैं जो झूठ सुनते ही बोलने वाले के गाल पर झन्नाटेदार चांटा रसीद करता है...झूठ बोलने वाले को दिन में ही तारे नज़र आने लगते हैं...ये सुनकर पिताश्री-माताश्री दोनों बेहद खुश..साइंटिस्ट से बोले..हमें इसी वक्त वो रोबोट दिलाओ...खैर रोबोट घर आ गया..पप्पूजी रोबोट से बेखबर घर पर आए..स्कूल छूटता था 2 बजे और पप्पूजी घर पर शाम को 6 बजे आए...माताश्री-पिताश्री ने पूछा...कहां थे अब तक...पप्पूजी ने तपाक से कहा..वो दोस्त के घर पर भजन था...वहीं गया था...पप्पूजी को पता नहीं था, पर्दे के पीछे रोबोट छुपा था..रोबोट बिना वक्त गंवाए बाहर आया और तड़ाक से पप्पूजी के गाल पर प्रसाद दे दिया...पिताश्री फौरन समझ गए..पप्पू ने झूठ बोला है...बोले...सच-सच बताओ..कहां गए थे...पप्पू ने सच बोलना ही बेहतर समझा..वो..वो..दोस्तों के साथ फिल्म गया था...पिताश्री फौरन बोले...शर्म तो नहीं आती होगी, हम तुम्हारी उम्र के थे तो दिन-रात पढ़ाई के सिवा और कुछ नहीं सोचते थे...ये सुनते ही रोबोटजी मुड़े और पिताश्री के गाल पर भी एक जड़ दिया...पिताश्री का झूठ पकड़े जाने पर माताश्री को मौका मिल गया...बोलीं...देखा, आखिर है तो आप ही का बेटा न..जैसा बेटा, वैसा बाप...माताश्री के ये बोलते ही रोबोट धीरे से आया और एक उनके गाल पर भी धर दिया...

    2 टिप्पणियाँ:

    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

    रोबोट न हो तो ही अच्छा है।

    Learn By Watch ने कहा…

    बढ़िया है, आपके चार ब्लॉग हैं,

    कृपया चारों को "अपना ब्लॉग" में सम्मिलित करें

    अपना ब्लॉग एक हिन्दी ब्लॉग एग्रीगेटर है

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