खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

क्या नहीं करा देता नशा...खुशदीप

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  • मक्खन एक पार्टी में यार-दोस्तों के साथ ज़्यादा ही टल्ली हो गया...झूमता...लड़खड़ाता घर आया...

    मक्खनी ने दरवाजा खोला...मक्खन ने आधी बंद आंखों से ही देखा और बोला...सॉरी मैडम...लगता है गलत कॉल बेल बजा दी...
    मक्खनी पहले से ही भरी बैठी थी...फट पड़ी...बस यही नौबत आनी रह गई थी...नशे में इतनी अक्ल मारी गई कि पत्नी को भी भूल गए...
    मक्खन...माफ़ करना बहन, नशा आदमी को बड़े से बड़ा गम भुला देता है...

    3 टिप्पणियाँ:

    वन्दना ने कहा…

    हा हा हा।

    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

    जो न हो जाए वही कम है!

    गुड्डोदादी ने कहा…

    क्या पत्नी अस्पताल के क्षेत्र में नर्स हैं

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