खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

ये भारत के केकड़े हैं...Khushdeep

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  • Khushdeep Sehgal
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  • विदेश में किसी जगह तमाम देशों से क्रैब (केकड़े) मंगाकर प्रोसेस किए जा रहे थे...सभी देशों के क्रैब डब्बों में बंद होकर आए थे...लेकिन जो क्रैब भारत से आए थे उनके डब्बों के ढक्कन ही नहीं थे...ये देखकर सुपरवाइजर बड़ा हैरान हुआ...शिकायत करने यूनिट इंचार्ज के पास पहुंचा...कहा, ये भारत की कंपनी ने क्रैब के डब्बे खुले ही क्यों भेज दिए...अगर ये निकल कर भाग जाते तो...यूनिट इंचार्ज ने पूछा...क्या कोई क्रैब भागा...सुपरवाइजर ने कहा...नहीं, सर...
    यूनिट इंचार्ज ने कहा... तो फिर तू क्यों हलकान हुए जा रहा है...अरे बेवकूफ ये भारत के केकड़े हैं...ये बाहर नहीं निकल सकते...एक निकलने की कोशिश करेगा...तो बाकी के दस इसकी टांग खींचकर फिर नीचे ले जाएंगे...

    5 टिप्पणियाँ:

    वन्दना ने कहा…

    सही बात्।

    sagebob ने कहा…

    बहुत बढ़िया.

    रवीन्द्र प्रभात ने कहा…

    क्या बात है ....व्यंग्य के बहाने बढ़िया प्रसंग !

    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

    सुंन्दर!

    GANGA DHAR SHARMA ने कहा…

    पुराणी बात है सा.

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