खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

महिलाओं को देखने का समय...Khushdeep

एक डॉक्टर के क्लीनिक पर एक सज्ज्न पुरुष शाम को पहुंचे...एक घंटा क्लीनिक के रिसेप्शन पर बैठ कर वापस चले गए...यही सिलसिला चार-पांच दिन तक चलता रहा...न वो डॉक्टर को दिखाते और न ही रिसेप्शनिस्ट से एपांइटमेंट के लिए कोई बात करते...एक दिन रिसेप्शनिस्ट से रहा नहीं गया और उसने डॉक्टर से शिकायत कर दी...डॉक्टर ने कहा कि अब जो वो कभी आए तो मुझे बताना...

सज्जन पुरुष फिर पहुंचे तो डॉक्टर ने रिसेप्शनिस्ट से अपने केबिन में भेजने के लिए कहा....डॉक्टर ने पूछा कहिए मिस्टर क्या परेशानी है......रोज आते हो एक घंटा बैठकर चले जाते हो, ...क्या किसी को दिखाना है...

सज्जन पुरुष बोले...नहीं डॉक्टर साहब, मैं दिखाने नहीं मैं तो खुद देखने आता हूं...आप ही ने बाहर बोर्ड लगा रखा है न...महिलाओं को देखने का समय...शाम 5 से 6 बजे तक...
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'प्रैग्नेंट' क्यों नहीं किया...Khushdeep

नर्सिंग होम में स्वीपर का काम करने वाली कमला दनदनाती हुई चेयरमैन और प्रबंधक ड़ॉक्टर के केबिन में घुस गई...जाते ही दहाड़ते हुए बोली...डॉक्टर साहब ये तो कोई बात नहीं हुई...शीला को आपने प्रैग्नेंट किया...रेखा को आपने प्रैग्नेंट किया...सुनीता, विमला किस-किस का नाम गिनाऊं...आखिर मुझमें क्या कमी है...हमें भी काम करते साल से ज़्यादा हो गया...हमें तो किसी ने प्रैग्नेंट नहीं किया...आज तो मैं जवाब ले कर ही जाऊंगी कि आखिर कब करोगे प्रैग्नेंट....

(दरअसल कमला का कहने का मतलब था परमानेंट...अंग्रेजी बोलने के चक्कर में परमानेंट का प्रेग्नेंट हो गया था)
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मक्खन ने मक्खनी को फौरन बेड-रूम में बुलाया..Khushdeep

मक्खन दोपहर के 3 बजे बड़ी तेज़ी से घर आया...चेहरा खुशी से चमक रहा था...आते ही मक्खनी को आवाज दी...मक्खनी किचन में थी...मक्खन ने आदेशItalic दिया...सब काम छोड़कर बेडरूम में आए...मक्खनी बेचारी गैस वगैरहा बंद करके आई...तब तक मक्खन खिड़कियां वगैरहा सब बंद करके कमरे में अंधेरा कर चुका था...बेड पर लेटे मक्खन ने मक्खनी को भी बेड पर आने के लिए कहा...मक्खनी बेचारी ने वैसा ही किया...मक्खनी के आते ही मक्खन ने दोनों के ऊपर रज़ाई खींच ली...

फिर मक्खनी से अपनी बांह दिखा कर बोला...देख..मेरी रेडियम की नई घड़ी...अंधेरे में कितना, चमकती है...
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इब लगा ले तेरी बेटी कितना भी ज़ोर... Khushdeep

एक राजा की बड़ी सुंदर राजकुमारी थी...बिटिया ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा तो राजा को उसके हाथ पीले करने का फिक्र हुआ...लेकिन दामाद भी तो राजकुमारी की टक्कर का ही चाहिए...ऊपर से राजकुमारी का और फरमान...शादी करेगी तो सिर्फ सर्वगुण संपन्न लड़के से जिसमें 100 के 100 गुण हों...अगर एक भी गुण कम हुआ तो शादी नहीं करेगी...राजा ने बिटिया की इच्छा को देखते हुए पूरे राज्य में मुनादी करा दी कि जिसमें भी 100 गुण होंगे, उससे वो बिटिया की शादी कर देगा साथ ही एक जागीर का मालिक भी बना देगा...

लेकिन अब सर्वगुण संपन्न, 100 कलाओं को जानने वाला लड़का मिले तो मिले कहां से...किसी में 30 गुण तो किसी में 40... ज़्यादा से ज़्यादा राजा की नज़र में 60 गुण वाला लड़का ही आ सका...लेकिन राजकुमारी कहां शादी के लिए तैयार होने वाली...ऐसे ही मनचाहा लड़का मिल नहीं पा रहा था...और वक्त गुज़रता जा रहा था...राजा की परेशानी भी बढ़ती जा रही थी...राजकुमारी भी टस से मस होने को तैयार नहीं...

उसी राज्य में एक ताऊ रहता था...उसे राजा की परेशानी का पता चल गया...उसने अपने निखट्टू छोरे से कहा...चल भई चल, जैसे हर कुत्ते का दिन आता है, ऐसे ही तेरा भी आ गया है...तेरी शादी होगी राजकुमारी से...बस अब जैसे जैसे मैं कहता जाऊं, तू करता जाइओ...बस तुझे बोलना एक शब्द नहीं है...जो बोलूंगा मैं ही बोलूंगा...ये समझाने के बाद ताऊ छोरे को लेकर राजा के दरबार में जा धमका...

ताऊ राजा से सीधे लठ्ठमार लहजे में ही बोला...देख भई राजा...मैं झूठ तो बोलूं ना...तू कभी फेर कहे कि ताऊ ने झूठ बोल्या...मेरे छोरे में 98 गुण हैं...बस दो गुण नहीं है...अब इसमें तेरी लल्ली का मिज़ान बनता हो तो देख ले...98 गुण की बात सुनकर राजा की आंखों में चमक आ गई...बेचारा हर जगह की खाक जो छान चुका था...राजा ने ताऊ और छोरे को मेहमानखाने में ले जाकर तगड़ी खातिरदारी करने का हुक्म दिया और खुद बिटिया के कक्ष में जा पहुंचा...राजा ने बेटी को समझाया...बिटिया 98 से ज़्यादा गुण वाला लड़का नहीं मिल सकता...मैं ढूंढ ढूंढ कर हार चुका हूं...अब तेरी भलाई इसी में है कि तू इस लड़के से शादी कर ले...और मैं भी कन्यादान के फर्ज से मुक्ति पाऊं...राजकुमारी को भी पिता पर तरस आ गया और उसने शादी के लिए हां कर दी...धूमधाम से शादी हो गई...जागीर भी मिल गई...

शादी के बाद राजा के महल से बिटिया की विदाई का वक्त आया तो राजा ने ताऊ को अपने पास बुला कर कहा कि अब तो मेरी बिटिया आपकी हो गई है...अब बस मुझे वो दो गुणों के बारे में बता दो जो तुम्हारे बेटे में नहीं हैं...भई मेरी बिटिया भी समझदार है, पढ़ी लिखी है...हो सकता है कि वो ही उन दो गुणों के लिए तुम्हारे बेटे को तैयार कर दे...राजा की बात सुनकर ताऊ बोला...देख भई राजा... वैसे तो मैं अपने बेटे की दो कमजोरियों के बारे में किसी को बताता नहीं...अब तू इतना कह रहा है तो बता देता हूं...पहली बात...ये छोरा कुछ जाणता नहीं...और दूसरी बात...कोई इसे समझाने की कोशिश करे तो ये माणता नहीं...इब लगा ले तेरी बेटी कितना भी ज़ोर...

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1000 डालर का किस...Khushdeep

अब तो लिव इन रिलेशनशिप (रोमांटिक दोस्ती से थोड़ा ज्यादा और शादी से थोड़ा कम वाला रिश्ता) का रिवाज भारत के महानगरों में भी देखा जाने लगा है...लेकिन पश्चिम के देशों में बरसों से ये प्रचलन में है...ऐसे ही विदेश में एक जोड़ा बिना शादी किए ही साथ-साथ रहता था...एक दिन पुरुष पार्टनर (अब पति तो कह नहीं सकता) बॉथरूम में नहा रहा था...महिला पार्टनर (ये भी पत्नी नहीं) किचन में नाश्ता तैयार कर रही थी कि घर की डोर-बेल बजी...

महिला ने दरवाजा खोला...सामने एक टिपटॉप गबरू जवान खड़ा था...आते ही पूछा कि मिस्टर....कहां हैं...महिला ने जवाब दिया...बाथरूम में हैं, उन्हें थोड़ा टाइम लगेगा, आप काम बताइए...जवान बोला...कोई...कोई नहीं... दरअसल मुझे आपसे ही काम था...मैं एक मल्टीनेशन कंपनी में काम करता हूं...हमारी कंपनी ने एक लव प्रमोशन स्कीम चलाई हुई है...आप इसके तहत 1000 डॉलर कमा सकती हैं...

महिला ने भी सोचा मंदी का ज़माना है...1000 डॉलर कमा लिए जाए तो क्या बुराई है...महिला ने पूछा...इसके लिए मुझे क्या करना होगा...जवान बोला...कुछ नहीं बस आपको मुझे दो मिनट का एक किस देना होगा...महिला अचकचाई लेकिन फिर 1000 डॉलर के लालच में शर्त मानने को तैयार हो गई...

थोड़ी देर बाद पुरुष पार्टनर बाथरूम से बाहर निकला तो महिला बड़ी खुश दिखाई दी...पूछा... क्या बात है...महिला ने कहा...मैंने आज सुबह सुबह घर बैठे ही 1000 हज़ार डॉलर कमा लिए...ये सुनकर पुरुष पार्टनर बोला...आज तो वाकई बड़ा अच्छा दिन है...मेरे आफिस के एक साथी ने मुझसे दो महीने पहले 1000 डॉलर उधार लिए थे और उसने वादा कर रखा है कि आज सुबह ही वो घर पर आकर उधार चुका जाएगा...
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मक्खन ब्रांच मैनेजर...Khushdeep

मक्खन एक दिन पेड़ की डाल पर चढ़ा हुआ था...इधर से उधर होता मक्खन किसी कंपनी के सीईओ की तरह हाव-भाव दिखा रहा था...कभी किसी को इंस्ट्रक्शन देता...कभी मोबाइल पर किसी को डांटता...घंटों ये नज़ारा चलता रहा...

फिर मक्खन के दोस्त ढक्कन ने ही सारी बात साफ की....दरअसल मक्खन की बड़ी इच्छा थी कि वो भी आईआईएम, अहमदाबाद से एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद लाखों की सेलरी का पैकेज ले...लेकिन एमबीए का एन्ट्रेस पास करना कोई खालाजी का घर नहीं था...मक्खन जी लाख कोशिश करने के बाद भी एन्ट्रेस टेस्ट पास नहीं कर पाए...

फिर क्या था बचा-खुचा जो दिमाग था वो भी हिल गया....और मक्खन जी बगैर एमबीए हुए ही अपने को पेड़ की डाल पर ब्रांच मैनेजर समझने लगे....
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गेम गेम का फर्क...Khushdeep

कर्मचारी फुटबॉल की बात करते हैं...
मैनेजर्स क्रिकेट की बात करते हैं...
बॉस टेनिस की बात करते हैं...
सीईओ गोल्फ की बात करते हैं...

(ये पोस्ट बढ़ने के साथ गेम की बॉल छोटी क्यों होती जाती है...)
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दूर का भाई...Khushdeep

15 साल का पप्पू और 6 साल का चप्पू एक ही स्कूल में दाखिला लेने गए...दाखिला लेने वाले टीचर को पप्पू ने बताया कि चप्पू रिश्ते में उसका दूर का भाई लगता है...टीचर ने पप्पू से पिता का नाम पूछा...जवाब मिला..गप्पू...
टीचर ने चप्पू से सवाल किया, तुम्हारे पिता का नाम...जवाब मिला...गप्पू...
टीचर थोड़ा हैरान हुआ..फिर दोनों से पता पूछा तो जवाब मिला...मकान नंबर 117, गली नंबर 6, प्रेम नगर...
टीचर ने फिर पप्पू से कहा कि जब तुम्हारे पिता का नाम एक, रहते एक मकान में ही हो तो फिर चप्पू तुम्हारा दूर का भाई कैसे हुआ....

पप्पू ने जवाब दिया...मास्टर जी मैंने ये कब कहा कि चप्पू मेरा सगा भाई नहीं है...दरअसल उसके और मेरे बीच सात भाई-बहन और भी हैं...इस लिहाज से हुआ न वो दूर का भाई...
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और वो ताली बजाएगा...Khushdeep

पति...लड़की होगी...
पत्नी...नहीं लड़का होगा...

पति...लड़की...

पत्नी...लड़का...

भगवान...ख़ामोश...मुझे इस तरह उलझा दोगे तो ऐसी कन्फ्युज़िंग चीज़ पैदा हो जाएगी कि तुम दोनों रोओगे और वो ताली बजाएगा...
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मक्खन और मैडम का छोटा बेबी...Khushdeep

मक्खन एक बार गोवा गया था...वहां पेइंग गेस्ट के तौर पर वो एक मैडम के घर टिकने चला गया...लंबे सफ़र के बाद देर रात वो गोवा पहुंचा था...

मैडम ने मक्खन से कहा कि घर में दो ही बेड-रूम हैं...एक में मैडम और उसके मिस्टर सोते हैं...दूसरे बेडरूम में मैडम का छोटा बेबी सोता है...

मैडम ने मक्खन से कहा कि वो बेबी वाले रूम मे सो जाए...मक्खन ने सोचा कि एक तो पूरे दिन की थकान, ऊपर से ये बेबी का चक्कर...रात को कहीं परेशान ही न कर दे...मक्खन ने मैडम से कहा कि परेशान न हों...वो ड्राईंग रूम में ही सोफे पर आराम से सो जाएगा...

खैर मक्खन ड्राईंग रूम में ही सो गया...सुबह हुई मक्खन मैडम के साथ चाय पी रहा था कि अल्ट्रामॉड मॉडल जैसी एक रूपसी वहां अवतरित हुई...मक्खन ने मैडम से जानना चाहा कि सुंदरी का परिचय क्या है...

मैडम बोली...अरे यही तो है अपना छोटा बेबी...

मक्खन ने ठंडी सांस लेते हुए कहा कि अगर ये छोटा बेबी है तो मैं उल्लू का चरखा हूं...
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तू रहा झल्ला का झल्ला...Khushdeep

ढक्कन...यार मक्खन, एक बात तो बता...ये जंबो जेट प्लेन पर पेंट करने में कितना सारा पेंट लग जाता होगा...ट्रकों के हिसाब से ही पेंट लगता होगा...

मक्खन...तू रहा झल्ला का झल्ला...ओ बेवकूफा...पहले हम जंबो जेट को उड़ाते हैं...वो आसमान में उड़ते-उड़ते चिड़ी जितना छोटा रह जाता है...तो झट से पकड़ कर उस पर कूची मार देते हैं...है न पेंट की बचत ही बचत...
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