खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

मक्खन ब्रांच मैनेजर...Khushdeep

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  • Khushdeep Sehgal
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  • मक्खन एक दिन पेड़ की डाल पर चढ़ा हुआ था...इधर से उधर होता मक्खन किसी कंपनी के सीईओ की तरह हाव-भाव दिखा रहा था...कभी किसी को इंस्ट्रक्शन देता...कभी मोबाइल पर किसी को डांटता...घंटों ये नज़ारा चलता रहा...

    फिर मक्खन के दोस्त ढक्कन ने ही सारी बात साफ की....दरअसल मक्खन की बड़ी इच्छा थी कि वो भी आईआईएम, अहमदाबाद से एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद लाखों की सेलरी का पैकेज ले...लेकिन एमबीए का एन्ट्रेस पास करना कोई खालाजी का घर नहीं था...मक्खन जी लाख कोशिश करने के बाद भी एन्ट्रेस टेस्ट पास नहीं कर पाए...

    फिर क्या था बचा-खुचा जो दिमाग था वो भी हिल गया....और मक्खन जी बगैर एमबीए हुए ही अपने को पेड़ की डाल पर ब्रांच मैनेजर समझने लगे....

    3 टिप्पणियाँ:

    Rakesh Kumar ने कहा…

    मक्खन चढ़ के डाल पे खुद ही को भरमाये,ढक्कन उसकी पोल को सबको रहे दिखाय. ढक्कन -मक्खन की बात पे खुशदीप भाई ने दी पोस्ट बनाय.कहो कैसी लगी ?

    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

    लकड़ी का घोड़ा लकड़ी की काठी .....
    गाना साथ लगा दिया होता तो बहुत मजेदार होता।

    सञ्जय झा ने कहा…

    uri baba aiseich to appan bhi 'branch manager' .........
    pahile kyun na bataya bhaya.............


    pranam.

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