खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

इब लगा ले तेरी बेटी कितना भी ज़ोर... Khushdeep

Posted on
  • by
  • Khushdeep Sehgal
  • in
  • लेबल: , ,
  • एक राजा की बड़ी सुंदर राजकुमारी थी...बिटिया ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा तो राजा को उसके हाथ पीले करने का फिक्र हुआ...लेकिन दामाद भी तो राजकुमारी की टक्कर का ही चाहिए...ऊपर से राजकुमारी का और फरमान...शादी करेगी तो सिर्फ सर्वगुण संपन्न लड़के से जिसमें 100 के 100 गुण हों...अगर एक भी गुण कम हुआ तो शादी नहीं करेगी...राजा ने बिटिया की इच्छा को देखते हुए पूरे राज्य में मुनादी करा दी कि जिसमें भी 100 गुण होंगे, उससे वो बिटिया की शादी कर देगा साथ ही एक जागीर का मालिक भी बना देगा...

    लेकिन अब सर्वगुण संपन्न, 100 कलाओं को जानने वाला लड़का मिले तो मिले कहां से...किसी में 30 गुण तो किसी में 40... ज़्यादा से ज़्यादा राजा की नज़र में 60 गुण वाला लड़का ही आ सका...लेकिन राजकुमारी कहां शादी के लिए तैयार होने वाली...ऐसे ही मनचाहा लड़का मिल नहीं पा रहा था...और वक्त गुज़रता जा रहा था...राजा की परेशानी भी बढ़ती जा रही थी...राजकुमारी भी टस से मस होने को तैयार नहीं...

    उसी राज्य में एक ताऊ रहता था...उसे राजा की परेशानी का पता चल गया...उसने अपने निखट्टू छोरे से कहा...चल भई चल, जैसे हर कुत्ते का दिन आता है, ऐसे ही तेरा भी आ गया है...तेरी शादी होगी राजकुमारी से...बस अब जैसे जैसे मैं कहता जाऊं, तू करता जाइओ...बस तुझे बोलना एक शब्द नहीं है...जो बोलूंगा मैं ही बोलूंगा...ये समझाने के बाद ताऊ छोरे को लेकर राजा के दरबार में जा धमका...

    ताऊ राजा से सीधे लठ्ठमार लहजे में ही बोला...देख भई राजा...मैं झूठ तो बोलूं ना...तू कभी फेर कहे कि ताऊ ने झूठ बोल्या...मेरे छोरे में 98 गुण हैं...बस दो गुण नहीं है...अब इसमें तेरी लल्ली का मिज़ान बनता हो तो देख ले...98 गुण की बात सुनकर राजा की आंखों में चमक आ गई...बेचारा हर जगह की खाक जो छान चुका था...राजा ने ताऊ और छोरे को मेहमानखाने में ले जाकर तगड़ी खातिरदारी करने का हुक्म दिया और खुद बिटिया के कक्ष में जा पहुंचा...राजा ने बेटी को समझाया...बिटिया 98 से ज़्यादा गुण वाला लड़का नहीं मिल सकता...मैं ढूंढ ढूंढ कर हार चुका हूं...अब तेरी भलाई इसी में है कि तू इस लड़के से शादी कर ले...और मैं भी कन्यादान के फर्ज से मुक्ति पाऊं...राजकुमारी को भी पिता पर तरस आ गया और उसने शादी के लिए हां कर दी...धूमधाम से शादी हो गई...जागीर भी मिल गई...

    शादी के बाद राजा के महल से बिटिया की विदाई का वक्त आया तो राजा ने ताऊ को अपने पास बुला कर कहा कि अब तो मेरी बिटिया आपकी हो गई है...अब बस मुझे वो दो गुणों के बारे में बता दो जो तुम्हारे बेटे में नहीं हैं...भई मेरी बिटिया भी समझदार है, पढ़ी लिखी है...हो सकता है कि वो ही उन दो गुणों के लिए तुम्हारे बेटे को तैयार कर दे...राजा की बात सुनकर ताऊ बोला...देख भई राजा... वैसे तो मैं अपने बेटे की दो कमजोरियों के बारे में किसी को बताता नहीं...अब तू इतना कह रहा है तो बता देता हूं...पहली बात...ये छोरा कुछ जाणता नहीं...और दूसरी बात...कोई इसे समझाने की कोशिश करे तो ये माणता नहीं...इब लगा ले तेरी बेटी कितना भी ज़ोर...

    4 टिप्पणियाँ:

    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

    क्या कहने हैं!

    क्रांतिकारी हिन्दोस्तानी देशभक्त ने कहा…

    मजा आ गया पढकर

    Rakesh Kumar ने कहा…

    ताऊ के दो गुणों ने कैसा खेला खेल,राजा और राजकुमारी दोनों हो गए फेल.
    आज तो आपने मचा रक्खा है धौल ,देशनामा पर खोल रहे ब्लॉग जगत की पोल.
    एक बार फिर से खुशदीप भाई मेरे ब्लॉग पर आओ,समीर जी के दादा बनने का मुझको नेग दिलवाओ.

    डॉ० डंडा लखनवी ने कहा…

    प्रशंसनीय लेखन के लिए बधाई।
    ==========================
    कलम क्यों कहें यह तो शब्दों का बम है।
    कलम में बड़ी आपके मित्र दम है।
    ===========================
    होली मुबारक़ हो। सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

    एक टिप्पणी भेजें

     
    Copyright © 2009. स्लॉग ओवर All Rights Reserved. | Post RSS | Comments RSS | Design maintain by: Humour Shoppe