खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

Fancy Dress...मक्खन बना चॉक-बार...Khushdeep

मक्खन को एक बार फैंसी ड्रैस कंपीटिशन में हिस्सा लेना था...मक्खन ने पत्नी मक्खनी के सिर ड्रैस लाने की ज़िम्मेदारी छोड़ दी...

मक्खनी सांता क्लाज़ की ड्रैस ले आई...देखते ही मकखन भड़क गया....कभी काला सांता भी देखा है क्या...

मक्खनी क्या करती बेचारी...ड्रैस बदलकर स्नोमैन की ड्रैस ले आई...

मक्खन ने फिर सड़ा सा मुंह बनाकर कहा...स्नोमैन भी कभी काला हो सकता है क्या...

इस बार मक्खनी गई और एक फुटा ले कर आ गई...

मक्खन...अब ये क्या ले आई है...इस फुटे को अपने सिर पर मारूं क्या...
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मक्खनी...नहीं पीछे लगा लो...और कंपीटिशन में चॉक-बार बन कर जाओ....

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बच्चा मिट्टी खाए, दूध वाला पानी मिलाए तो...Khushdeep

1. बच्चा अगर मिट्टी खाता है तो क्या करें...

बच्चे को डाइनिंग टेबल पर आराम से बैठाएं...एक प्लेट में मिट्टी डाले और चम्मच के साथ उसे खाने के लिए पेश करें...साथ ही कहें...बेटा जितनी मर्जी मिट्टी खाओ लेकिन मैनर्स के साथ...फिर देखिए बच्चा मिट्टी के पास कभी फटकेगा भी नहीं....

2. दूध वाला अगर दूध में पानी मिलाता है तो क्या करें...

सुबह दूध वाला आए तो उससे कहिएगा...भईया आज से जो दूध तुम 28 रुपये लीटर देते हो, उस भाव में हम ये दूध नहीं लेंगे...हम तुम्हे एक लीटर दूध के 40 रुपये दिया करेंगे...दूध वाला भैया ये सुनकर थोड़ा हैरान-परेशान होगा...फिर उसकी परेशानी भांपते हुए कहिए...भइया ये फालतू के पैसे इसलिए हैं कि तुम हमारे दूध में मिनरल वाटर मिलाया करो...ये सरकारी नलकों से आने वाले पानी पर हमें कोई भरोसा नहीं है...फिर देखिए अगले दिन से दूध की क्वालिटी...

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मक्खन की बेबे (मां) गुम हो गई...Khushdeep

मक्खन की बेबे (मां) की मौत हो गई...भाईया जी (पिता) पहले ही दुनिया छोड़ कर जा चुके थे...मक्खन का बेबे से बड़ा जुड़ाव था...बेबे के बिना उसे दुनिया ही बेकार लगने लगी...अपने में ही गुमसुम रहने लगा...इसी तरह एक साल बीत गया...मक्खन के जिगरी ढक्कन से मक्खन की ये हालत देखी नहीं जा रही थी...लेकिन करे तो करे भी क्या...

तभी उसे किसी ने बताया कि शहर में कोई सयाना आया हुआ है...ढक्कन ने सोचा मक्खन को सयाने जी के पास ही ले जाता हूं...शायद वो ही उसे ठीक कर दें...मक्खन ने सयाने को अपना दर्द बताया...सयाना भी पहुंची हुई चीज़ था...उसने मक्खन को ठीक करने के लिए एक तरकीब सोची...उसने मक्खन से कहा...बच्चा, तेरी बेबे से पिछले जन्म में अनजाने में कोई बड़ी भूल हो गई थी...इसलिए ऊपर वाले ने बेबे को सजा के तौर पर इस जन्म में श्वान (कुत्ती) बना कर भेज दिया है...लेकिन जल्द ही तेरी बेबे से मुलाकात होगी...इसलिए परेशान मत हो...मक्खन सुन कर मायूस तो बड़ा हुआ लेकिन बेबे से जल्द मिलने की सोच कर ही थोड़ी तसल्ली हुई...बाहर निकले तो ढक्कन उसे खुश करने के लिए जलेबी की दुकान पर ले गया...दोनों जलेबी खा ही रहे थे कि एक कुत्ती वहां आ गई... और जलेबी के लालच में मक्खन को देख कर ज़ोर ज़ोर से पूंछ हिलाने लगी...मक्खन का कुत्ती को देखकर माथा टनका...सयाने जी के बेबे के बारे में बताए शब्द उसके कानों में गूंजने लगे...मक्खन ने जलेबी का एक टुकड़ा डाल दिया...कुत्ती ने झट से टुकड़ा चट कर लिया...और उचक-उचक कर मक्खन की टांगों पर पंजे मारने लगी...मक्खन ने सोचा हो न हो...ये मेरी बेबे ही लगती है...

मक्खन घर की ओर चला तो कुत्ती जी (सॉरी...बेबे) पीछे पीछे...मक्खन का भी मातृसेवा का भाव अब तक पूरी तरह जाग चुका था...बेबे को साथ लेकर ही मक्खन अपने घर में दाखिल हुआ और मक्खनी को आवाज़ दी...सुन ले भई...तूने बेबे को पहले बड़ा दुख दिया था...लेकिन इस बार बेबे जी को कोई तकलीफ हुई तो तेरी खैर नहीं...मक्खनी भी मक्खन के गुस्से की सोच कर डर गई...लो जी बेबे जी की तो अब मौज आ गई...कहां गली-गली नालियों में मुंह मारते फिरना...और कहां एसी वाला बढ़िया बेडरूम...बेबे जी के लिए बढ़िया बेड बिछ गया...बेड पर पसरे रहते और बढ़िया से बढ़िया खाना वहीं आ जाता...
 
मक्खन भी काम पर आते-जाते बेबे जी के कमरे में जाकर मिलना नहीं भूलता...एक दिन मक्खन काम से घर वापस आया तो आदत के मुताबिक बेबे जी के कमरे में गया...लेकिन ये क्या...बेड पर उसे बेबे जी नहीं दिखे....ये देखते ही मक्खन का पारा सातवें आसमान पर...चिल्ला कर मक्खनी को आवाज़ दी....बेबे जी कहां हैं...तूने फिर कोई उलटी सीधी हरकत की होगी...और वो नाराज़ होकर चली गई होंगी...इस पर मक्खनी ने कहा....नाराज़ न होओ जी...ओ आज शामी बेबे जी नू घुमाण लई भाईया जी आ गए सी, ओन्हा नाल ही सैर ते गए ने...(आज शाम को बेबे जी को घुमाने के लिए भाईया जी आ गए थे...उन्हीं के साथ सैर पर गई हैं...)

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Cricket and China...वेरी इंट्रस्टिंग गेम...Khushdeep

एक बार चीन के राष्ट्राध्यक्ष भारत के दौरे पर आए...उन्हीं दिनों में दिल्ली में भारत और पाकिस्तान के बीच टेस्ट मैच चल रहा था...चीन के राष्ट्राध्यक्ष को भारत के प्रधानमंत्री टेस्ट मैच दिखाने ले गए...मैच का पहला ओवर शुरू हुआ...हर बॉल पर चीनी राष्ट्राध्यक्ष को बड़ा मज़ा आ रहा था...

एक ओवर बाद ही छोर बदलने के लिए खिलाड़ी इधर से उधर होने लगे...ये देखकर चीनी राष्ट्राध्यक्ष भी ताली बजाते हुए सीट छोड़ कर उठ खड़े हुए...शिष्टाचारवश भारत के प्रधानमंत्री को भी उठना पड़ा...

चीनी राष्ट्राध्यक्ष ने कहा...वेरी इंट्रस्टिंग गेम...मैं अपने देश में भी इसे शुरू करने को कहूंगा...लेकिन आपको नहीं लगता कि इस गेम को खेलने के लिए वक्त थोड़ा कम रख गया है...सिर्फ पांच मिनट...

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Tipu Sultan vs Tunni Uncle...टीपू सुल्तान कौन था...Khushdeep


मक्खन...गुल्ली पुतर...इधर आ...ज़रा चेक करूं कि स्कूल में क्या पढ़ता है...बता टीपू सुल्तान कौन था...

गुल्ली...पता नहीं...

मक्खन...स्कूल में क्लास में रहा करे तो पता चले न कि टीपू सुल्तान कौन था...

गुल्ली...डैडी जी...टुन्नी अंकल कौन है...पता है...

मक्खन...पता नहीं...वैसे कौन है ये टुन्नी...

गुल्ली...कभी घर में रहा करो तो पता चले न...

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jealousy in humour...नैनो को लगी मारूति 800 की आह...Khushdeep

मारूति  800 अब अतीत की बात हो चली है...लेकिन जब देश में नैनो के आने का बड़ा हो-हल्ला था तो मारूति  800 के सीने पर सांप लौटते थे...ये मारूति 800  की आह लगी कि नैनो को ज़्यादा भाव नहीं मिल रहा...अब देखिए मारूति 800 और नैनो जब पहली बार एक दूसरे से मिली थीं तो क्या हुआ था...

मारुति 800 नई नवेली नैनो से पहली बार मिली...

मारुति ने नैनो पर चुटकी ली...ए री तेरी दोनों आंखें बाहर की ओर क्यों निकली हुई हैं...

नैनो...पहले पीछे तशरीफ रखने वाली जगह पर पूरा इंजन ठुकवा...फिर मुझसे बात करना...देखना आंखें बाहर आती हैं या नहीं...

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humour...चूहे का कांफिडेंस...Khushdeep


एक चूहा लाल गुलाब लेकर शेरनी के पास पहुंच जाता है...

बड़े अदब से पैरों पर झुकते हुए शेरनी को प्रपोज़ करता है...

शेरनी बोली...पहले जा...आईने में जाकर सूरत देख...

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चूहा...सूरत पे मत जा पगली...बस कॉन्फिडेंस देख कॉन्फिडेंस...


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दिमाग से जुड़ा एक universal truth...Khushdeep

मक्खन मार्का लोगों में एक बात बड़ी अच्छी होती है कि अपने दिमाग का बहुत नाप तोल कर इस्तेमाल करते हैं..कोशिश यही रहती है कि दिमाग को कम से कम खर्च किया जाए...क्योंकि जल्दी ख़त्म हो गया तो किसके दरवाज़े पर जाकर मांगेंगे...यह तो रही मक्खन जैसे genius लोगों की बात..लेकिन दिमाग से जुड़ा एक universal truth भी है, जो दुनिया के हर मर्द पर लागू होता है...


दिमाग शरीर का सबसे अहम हिस्सा होता है...

24 घंटे, 365 दिन ये एक्टिव रहता है...

इंसान के पैदा होते ही ये काम करना शुरू कर देता है...

और...

इंसान की शादी होने तक ये काम करता रहता है...
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मुंडा तेजी से वापस आ रहा है...Khushdeep

मक्खन का पुतर गुल्ली सरकारी प्राइमरी स्कूल में गिरते-पड़ते पांचवीं पास कर गया...वो स्कूल पांचवी तक ही था...अब प्राइवेट स्कूल में छठी क्लास में दाखिला कराने के लिए मक्खन पंहुचा तो प्रिसिंपल ने कहा कि हम टेस्ट लिए बगैर दाखिला नहीं देते...मक्खन ने कहा...ले लो जी टेस्ट....टेस्ट हो गया...प्रिसिंपल ने टेस्ट का नतीजा देखकर कहा कि हमारे हिसाब से इसे चौथी क्लास में ही एडमिशन दिया जा सकता है...मरता क्या न करता...गुल्ली का चौथी में एडमिशन हो गया...लेकिन महीने बाद ही स्कूल से मक्खन को बुलावा आ गया...प्रिंसिपल ने कहा कि गुल्ली चौथी लायक भी नहीं है...इसे तीसरी में डाल रहे हैं...अब पढ़ाना तो था ही मक्खन ने कहा.. डाल दो जी तीसरी में...लेकिन ये सिलसिला यहीं नहीं थमा...हर हफ्ते-दो हफ्ते बाद मक्खन को बुलावा आता और गुल्ली को एक क्लास और पीछे कर दिया जाता...दूसरी, पहली, केजी...अब जब गुल्ली जी केजी में वापस आ गए तो मक्खन बड़ी तेज़ी से स्कूटर चलाता हुआ घर लौटा...घर के नीचे से ही पत्नी मक्खनी को आवाज दी....नी मक्खनिए...नी मक्खनिए...छेती तैयार हो जा...मुंडा जित्थो आया सी ओथे ही जाण लई बड़ी तेज़ी नाल वापस आ रेया ई....
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मक्खन का ओलम्पिक लव...Khushdeep

मक्खनी सहेली से...अपने पति मक्खन की क्या बताऊं, वो ओलम्पिक लव पर यकीन करते हैं...

सहेली....तू तो बड़ी खुशकिस्मत है, तेरे पति तुझे ओलम्पिक जैसा विशाल प्यार करते हैं...
 

मक्खनी....खाक किस्मत है...ये प्यार ओलम्पिक की तरह ही चार साल में एक बार आता है...और उसमें भी प्रदर्शन भारत की तरह ही रहता है...
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बस इतना सा ख्वाब है...Khushdeep

शहर के माचो लड़कों की क्या ख्वाहिश होती है...
220 सीसी पल्सर
या
225 सीसी करिज्मा
या
350 सीसी रायल एनफील्ड्स
या
1300 सीसी हायाबूसा ब्रैंड की सुपरबाइक खरीदना...


जानते हैं क्यों...
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सिर्फ एक 80 सीसी की स्कूटी का पीछा करने के लिए...
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बीवी को पिक्चर-विक्चर दिखा लाना...Khushdeep

मक्खन ने दीवाली से पहले घर पर सफ़ाई-पुताई कराई...पुताई वाला ज़्यादा उम्र का नहीं था...उसने बड़ी मेहनत से काम किया...घर को चमका दिया...काम खत्म हुआ तो मक्खन ने खुश होकर तय मेहनताने के अलावा 200 रुपये और ईनाम के तौर पर दिए और कहा... जाओ ऐश करो...शाम को बीवी को पिक्चर-विक्चर दिखा लाना...
शाम को पांच बजे मक्खन के घर की कॉल-बेल बजी...मक्खन ने दरवाजा खोला तो पुताई वाला ही खड़ा था...सुबह से बिल्कुल अलग ही हुलिया...टिप-टॉप, बाल-वाल शैम्पू किए हुए..परफ्यूम लगाया हुआ...मक्खन ने पूछा...क्या बात है... कुछ रह गया था क्या...
लड़का शर्माते हुए बोला...नहीं...बस मैडम को भेज दीजिए...आपने ही सुबह कहा था न कि शाम को बीवी को पिक्चर-विक्चर दिखा लाना...
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पत्नी की पाती पति के नाम...Khushdeep


एक गांव की सीधी-साधी महिला की एक शहरी बाबू से शादी हो गई । उसके पति शहर में किसी संस्थान में कार्यरत थे। महिला पति को चिट्टी लिखना चाहती थी पर अल्पशिक्षित होने के कारण उसे यह पता नहीं था कि पूर्णविराम कहां लगेगा । इसीलिये उसका जहां मन करा, वहीं चिट्ठी में पूर्ण विराम लगा दिया। उसने चिट्ठी में अर्थ का क्या अनर्थ किया, आप खुद ही पढ़िए...
मेरे प्यारे जीवनसाथी मेरा प्रणाम आपके चरणो मे । आप ने अभी तक चिट्टी नहीं लिखी मेरी सहेली कॊ । नोकरी मिल गयी है हमारी गाय को । बछडा दिया है दादाजी ने । शराब की लत लगा ली है मैने । तुमको बहुत खत लिखे पर तुम नहीं आये कुत्ते के बच्चे । भेड़िया खा गया दो महीने का राशन । छुट्टी पर आते समय ले आना एक खूबसूरत औरत । मेरी सहेली बन गई है । और इस समय टीवी पर गाना गा रही है हमारी बकरी । बेच दी गयी है तुम्हारी मां । तुमको बहुत याद कर रही है एक पड़ोसन । हमें बहुत तंग करती है तुम्हारी बहन । सिर दर्द मे लेटी है तुम्हारी पत्नी...
(साभार...शिवम मिश्रा, मैनपुरी) 
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