खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

पत्नी की पाती पति के नाम...Khushdeep

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  • Khushdeep Sehgal
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  • एक गांव की सीधी-साधी महिला की एक शहरी बाबू से शादी हो गई । उसके पति शहर में किसी संस्थान में कार्यरत थे। महिला पति को चिट्टी लिखना चाहती थी पर अल्पशिक्षित होने के कारण उसे यह पता नहीं था कि पूर्णविराम कहां लगेगा । इसीलिये उसका जहां मन करा, वहीं चिट्ठी में पूर्ण विराम लगा दिया। उसने चिट्ठी में अर्थ का क्या अनर्थ किया, आप खुद ही पढ़िए...
    मेरे प्यारे जीवनसाथी मेरा प्रणाम आपके चरणो मे । आप ने अभी तक चिट्टी नहीं लिखी मेरी सहेली कॊ । नोकरी मिल गयी है हमारी गाय को । बछडा दिया है दादाजी ने । शराब की लत लगा ली है मैने । तुमको बहुत खत लिखे पर तुम नहीं आये कुत्ते के बच्चे । भेड़िया खा गया दो महीने का राशन । छुट्टी पर आते समय ले आना एक खूबसूरत औरत । मेरी सहेली बन गई है । और इस समय टीवी पर गाना गा रही है हमारी बकरी । बेच दी गयी है तुम्हारी मां । तुमको बहुत याद कर रही है एक पड़ोसन । हमें बहुत तंग करती है तुम्हारी बहन । सिर दर्द मे लेटी है तुम्हारी पत्नी...
    (साभार...शिवम मिश्रा, मैनपुरी) 

    6 टिप्पणियाँ:

    Rakesh Kumar ने कहा…

    फिर क्या हुआ खुशदीप भाई ?

    Shah Nawaz ने कहा…

    मतलब कुछ का कुछ निकल गया... हा हा हा हा... इससे पता चलता है भाषा में व्याकरण का महत्त्व...

    ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

    Bahut Badhiya.

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    क्या ब्लॉगों की समीक्षा की जानी चाहिए?
    क्यों हुआ था टाइटैनिक दुर्घटनाग्रस्त?

    सुशील बाकलीवाल ने कहा…

    वाकई मजेदार रहा ये पूर्णविराम परिवर्तन ।

    सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

    अरे वाह ....मज़ा आ गया ....अति सुन्दर

    Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

    दिन मैं सूरज गायब हो सकता है

    रोशनी नही

    दिल टू सटकता है

    दोस्ती नही

    आप टिप्पणी करना भूल सकते हो

    हम नही

    हम से टॉस कोई भी जीत सकता है

    पर मैच नही

    चक दे इंडिया हम ही जीत गए

    भारत के विश्व चैम्पियन बनने पर आप सबको ढेरों बधाइयाँ और आपको एवं आपके परिवार को हिंदी नया साल(नवसंवत्सर२०६८ )की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ!

    आपका स्वागत है
    "गौ ह्त्या के चंद कारण और हमारे जीवन में भूमिका!"
    और
    121 करोड़ हिंदुस्तानियों का सपना पूरा हो गया

    आपके सुझाव और संदेश जरुर दे!

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