खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

मुंडा तेजी से वापस आ रहा है...Khushdeep

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  • Khushdeep Sehgal
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  • मक्खन का पुतर गुल्ली सरकारी प्राइमरी स्कूल में गिरते-पड़ते पांचवीं पास कर गया...वो स्कूल पांचवी तक ही था...अब प्राइवेट स्कूल में छठी क्लास में दाखिला कराने के लिए मक्खन पंहुचा तो प्रिसिंपल ने कहा कि हम टेस्ट लिए बगैर दाखिला नहीं देते...मक्खन ने कहा...ले लो जी टेस्ट....टेस्ट हो गया...प्रिसिंपल ने टेस्ट का नतीजा देखकर कहा कि हमारे हिसाब से इसे चौथी क्लास में ही एडमिशन दिया जा सकता है...मरता क्या न करता...गुल्ली का चौथी में एडमिशन हो गया...लेकिन महीने बाद ही स्कूल से मक्खन को बुलावा आ गया...प्रिंसिपल ने कहा कि गुल्ली चौथी लायक भी नहीं है...इसे तीसरी में डाल रहे हैं...अब पढ़ाना तो था ही मक्खन ने कहा.. डाल दो जी तीसरी में...लेकिन ये सिलसिला यहीं नहीं थमा...हर हफ्ते-दो हफ्ते बाद मक्खन को बुलावा आता और गुल्ली को एक क्लास और पीछे कर दिया जाता...दूसरी, पहली, केजी...अब जब गुल्ली जी केजी में वापस आ गए तो मक्खन बड़ी तेज़ी से स्कूटर चलाता हुआ घर लौटा...घर के नीचे से ही पत्नी मक्खनी को आवाज दी....नी मक्खनिए...नी मक्खनिए...छेती तैयार हो जा...मुंडा जित्थो आया सी ओथे ही जाण लई बड़ी तेज़ी नाल वापस आ रेया ई....

    5 टिप्पणियाँ:

    Rakesh Kumar ने कहा…

    ये तो वही बात हुई की मक्खन मठ्ठे में घुल दही बने फिर दही से दूध.दूध बनेगा तो मक्खन क्या कहलायेगा,और फिर मक्खनी और गुल्ली का क्या होगा.गंभीर मसला है,कुछ तो सोचो खुशदीप भाई.फिर तो आपके स्लोग ओवर भी........

    दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

    हा हा हा!!!

    G.N.SHAW ने कहा…

    गुल्ली का खेल है आगे पीछे होगा ही !

    Shah Nawaz ने कहा…

    :-)

    aarkay ने कहा…

    khushdeep ji, yeh kya, progression ki jagah regression !
    parh kar mazaa aa gaya

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