खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

ललित शर्मा की हाज़िरजवाबी...खुशदीप


एक बार ललित शर्मा भाई मॉर्निंग वॉक पर निकले...किसी सिरफिरे ने सड़क पर केले का छिलका फेंक रखा था...ललित भाई को छिलका दिखा नहीं और जा फिसले...पार्क के पास ही एक गधे महाराज घास पर हाथ साफ कर रहे थे...ललित भाई का बैलेंस बना नहीं और वो गधे के पैरों के पास जा गिरे...वहीं एक सुंदर सी मैडम खड़ी थी...मैडम से हंसी रोकी नहीं गई और चुटकी लेते हुए ललित भाई से बोली...क्यों सुबह-सुबह बड़े भाई के पैर छू रहे हो क्या...ललित भाई भी ठहरे ललित भाई...कपड़े झाड़ते हुए उठ कर मैडम से बड़े अदब से बोले...जी भाभी जी...

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एक कंजूस व्यापारी के दादाजी की मौत हो गई...वो अखबार में शोक विज्ञापन देने के लिए गया...उसने विज्ञापन दिया...दादाजी खत्म....अखबार के स्टॉफ ने कहा...इतना छोटा विज्ञापन हम स्वीकार नहीं करते, कम से कम पांच शब्द विज्ञापन में होने चाहिए...कंजूस व्यापारी ने बिना एक मिनट गंवाए कहा...दादाजी खत्म, व्हील चेयर बिकाऊ...
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जिन्न से भी बड़ा जिन्न...खुशदीप



एक सयाने की जिन्न से दोस्ती थी...एक बार जिन्न कुछ दिन तक सयाने से मिलने नहीं आया...सयाने को फिक्र हो गई...उसने किसी तरह जतन कर जिन्न को बुलाया...

जिन्न आया तो लेकिन बदहवास हालत में...चेहरे से हवाइयां उड़ रही थीं...इस तरह जिस तरह किसी टार्चर रूम से बड़ी मुश्किल से निकल कर आया हो...

सयाने ने पूछा...क्या हुआ जिन्न भाई, तुम दुनिया के होश उड़ाते हो तुम्हारी ये हालत किसने बना दी...

जिन्न बोला....क्या बताऊं सयाने भाई...इस बार मुझे खुद ही मुझसे भी बड़ा जिन्न चिमड़ गया था...बड़ी मुश्किल से उसकी सौ-डेढ़ सौ पोस्ट पढ़ने के बाद जान छुड़ाकर आया हूं...बस डर यही है कि वो ब्लॉगर जिन्न और ताजा पोस्ट लेकर पीछे-पीछे यहां भी न आ धमके...


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बॉस सताए तो ये प्रार्थना करो...खुशदीप



बॉस का सताया एक बंदा ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है...


हे प्रभु,
मुझे इतनी बुद्धि दो,
मैं बॉस के दिमाग को पढ़ सकूं...

मुझे इतना संयम दो,
मैं बॉस के हुक्म झेल सकूं...


पर प्रभु,
मुझे ताकत कभी मत देना,
वरना बॉस मारा जाएगा
कत्ल मेरे सिर आएगा...
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हाथी की सवारी गांठती चींटी...खुशदीप

एक हाथी स्विमिंग पूल में फिसल कर गिर गया...स्विमिंग पूल में जितनी चींटिया थी बाहर भागने लगी...लेकिन एक दिलेर चींटी हाथी के ऊपर ही चढ़ गई...उसकी सहेली ने देखा तो चिल्ला कर बोली...डुबो...डुबो साले को पानी में...स्विमिंग पूल में घुस कर लड़कियों को छेड़ता है....

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गुल्ली स्कूल से आकर मक्खन से बोला....डैडी जी, डैडी जी स्कूल वाले स्विमिंग पूल के लिए डोनेशन मांग रहे हैं...सुबह क्या ले जाऊं...

मक्खन...डोनेशन देना ज़रूरी है तो एक लोटा पानी ले जाना...
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हाईप्रोफाइल कैंडल मार्च की तैयारी...खुशदीप

कैंडल मार्च देश की ज़रूरत बन गया है...सोशलाइट्स के लिए खास तौर पर...इसी बहाने एक झटके में जता दिया जाता है कि देश और समाज के लिए अहम मुद्दों पर दिखाने के लिए उनका आब्लिगेशन कितना स्ट्रॉन्ग होता है...ये व्यंग्य मैंने मुंबई हमले की पहली बरसी पर लिखा था...

"हमको कैंडल लाइट विजिल करना मांगता...आफ्टरऑल 26/11 का फर्स्ट एनिवर्सरी है...हम देश के रिस्पांसिबल सिटीजन है...हमारा भी कुछ मॉरल ड्यूटी बनता है...कैसे पता चलेगा कि हमारा सोशल ऑब्लिगेशन कितना स्ट्रॉन्ग है"...शहर के इलीट क्लब में 25 नवंबर को यही हॉट डिस्कशन था...एक तरफ किटी की टेबल पर विदेशी परफ्यूम में तर-बतर मोहतरमाएं...और दूसरी तरफ बिलियर्डस की टेबल पर शाट लेते हुए जेंटलमैन
...साइड टेबल पर करीने से लाल परी से भरे क्रिस्टल के पैमाने भी सजे हुए हैं...

हां तो यंग मेन एंड यंग लेडीज़ (यहां उम्र जितनी भी हो जाए लेकिन चेहरे पर पैसे की चमक सबको एवरग्रीन यंग रखती है)...क्या प्रपोजल्स है कल के लिए...सोशल फंड से अभी एडवांस पास करा लेते हैं...कल कोई दिक्कत नहीं आएगी...

सबसे पहले मिसेज दारूवाला उठती हैं...मेरे ख्याल से कल इलीट क्लब से सिटी मॉल तक आधे किलोमीटर का कैंडल लाइट मार्च निकाला जाए...हमारे जैसी सेलिब्रटीज़ इसमें हिस्सा लेंगी तो शहर के आम लोगों को इससे अच्छा इन्सपिरेशन मिलेगा...मिसेज दारूवाला की बात खत्म होने से पहले ही क्लैपिंग से क्लब गूंज उठता है...

मिस्टर हाथी तत्काल मिसेज दारूवाला के प्रपोजल को सेकंड करते हैं...हां तो ठीक रहा कल हम सब शाम को पांच बजे क्लब में मिल रहे हैं...पहले वेलकम मेनू सेट कर लिया जाए...हाई टी और जूस के साथ चीज़ सैंडविच और गार्लिक ब्रेड ठीक रहेगी...भई हम सारे ही कलरी-कॉन्शियस है...ऐसा है सब को वॉक करना है तो सब को पाकेट में रखने के लिए ड्राई-फ्रूट्स के पैक दे दिए जाएंगे...एनर्जी का लेवल मेंटेन रहेगा...आपसे एक रिक्वेस्ट है, ड्राई-फ्रूट्स के पैक पाकेट में ही रखिएगा..ओपन करने से आम लोगों में अच्छा मैसेज नहीं जाएगा...

अभी मिस्टर हाथी ने अपनी बात भी पूरी नहीं की थी कि लड़खड़ाते कदमों से मिस्टर पीके माइक के पास आकर बोले...अरे मिस्टर हाथी मरवाएंगे क्या...इतनी लंबी वॉक...वो भी सूखे-सूखे...गला तर करने का भी कोई प्रपोजल होगा या नहीं..इस पर मिस्टर हाथी ने जवाब दिया...मिस्टर पीके...यू भी न...टू मच...बडी़ जल्दी वरी करने लग जाता है...अरे वॉक के बाद सिटी माल के ओपन टेरेस रेस्तरां में डिनर से पहले कॉकटेल का भी अरेजमेंट रख लेते हैं...वैसे कैंडल लाइट मार्च से थोडी दूरी पर एक मोबाइल कार-ओ-बार भी कन्वीनिएंस के लिए साथ-साथ चलेगी...

अभी ये बात चल ही रही थी कि मिस कलरफुल खडी़ हो गईं...मिस्टर सेक्रेट्री हमको आपसे एक शिकायत होता...पिछली बार जेसिका लाल इश्यू पर कैंडल लाइट मार्च निकाला था तो आपने प्रेस के जिन लोगों को इन्वाइट किया था, उन्हें ज़रा भी न्यूज़-सेंस नहीं था...मैंने उस ओकेशन के लिए स्पेशल चेन्नई से कांजीवरम की साड़ी मंगाया था...लेकिन अगले दिन पेज थ्री पर मेरा एक भी फोटोग्राफ नहीं छपा...मेरा दस हज़ार रुपया पानी में चला गया ...इस बार उन्हें पहले से ही अलर्ट कर दीजिएगा कि कल कैंडल लाइट मार्च को कवर करते हुए वैसा सिली मिस्टेक न हो...चाहें तो एंगल वगैरहा सेट करने के लिए एक बार फुल ड्रेस रिहर्सल भी कर लेते हैं...सभी रिस्पेक्टेड लेडीज़ ने मिस कलरफुल की बात को ज़ोरदार क्लैपिंग के साथ एप्रिशिएट किया...

इसके बाद सभी ने आखिरी नोट पर कल के प्रोग्राम की सक्सेस के लिए चीयर्स किया...

(...धन्य है हमारे ये सोशेलाइट्स)

LADY ON THE PHONE AND MAKKHAN....KHUSHDEEP
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फिर टेढ़ा है, पर मेरा है...खुशदीप

मैं स्लॉग ओवर ब्लॉग पर नई पोस्ट के साथ अपने सारे पुराने व्यंग्य भी एक ही जगह लाने का प्रयास कर रहा हूं...ये वाली पोस्ट मैंने  12 Dec 2009  को लिखी थी...इसके बाद भी ब्लॉगवुड से काफ़ी नए पाठक जुड़े...उनकी खिदमत में ही पेश कर रहा हूं...

बुधवार से मन बड़ा खराब चल रहा है...वजह है हमारा बजाज...टेढ़े बजाज का खटारा खटराग...लोगबाग बेशक उसे स्कूटर कहने की गुस्ताखी करते हैं लेकिन हमारे लिए तो वो अश्वराज चेतक से कम नहीं...पिछले 18 साल से जब भी ये चेतक महाराज मुझे सवारी कराते रहे हैं, मुझे यही लगता है कि राणा प्रताप की आत्मा मेरे अंदर आ गई है...वो तो मूंछे नहीं रखी हुई, नहीं तो चेतक की हर उड़ान पर कलफ की तरह ही कड़क हो जाया करती और गाना गाया करती...हमरी ना मानो तो बजजवा से पूछो...(सुन रहे हैं न ललित शर्मा भाई...)

आप पूछेंगे कि ये सुबह-सुबह कौन सा वीत-राग ले बैठा...ओ बजाज जी, तेरे ऐलान ने बड़ा दुख दीना...अब आप कहेंगे...कौन बजाज...अरे वही बजाज जो कल तक बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर दिखाते रहते थे...हमारा बजाज, हमारा बजाज करते रहते थे...इन बजाजों ने बुधवार को ऐलान कर दिया कि स्कूटर कारोबार को पूरी तरह राम-राम करने जा रहे हैं....अब इन बजजवों को कौन याद दिलाए इनके एड के वो जिंगल, जिनमें कस्मे-वादे किए जाते थे कि बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर आज भी और कल भी हमारे साथ रहेगी... देश की दो पीढ़ियां इस जिंगल को गुनगुनाते हुए ही जवानी से सठियाने की दहलीज पर आ गईं और अचानक ये अलविदा-अलविदा के सुर छेड़ने लगे (लगता है इन्हें भी ब्लॉगरी के ताजा जिन्न ने जकड़ लिया है)...

तो जनाब ये बजाज वाले कह रहे हैं कि उनके स्कूटर के सभी जाने-माने मॉडलों पर परदा गिरने की घड़ी आ गई है..कंपनी ने तीन साल पहले ही चेतक मॉडल बनाना बंद कर दिया था...बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज के मुताबिक इस कारोबारी साल के अंत तक कंपनी क्रिस्टल सीरीज के स्कूटर का उत्पादन भी बंद कर देगी...1980 के दशक में 'हमारा बजाज' कर्मशियल्स बनाने वाली ऐड एजेंसी लोवे इंडिया के चेयरमैन आर बाल्की कहते हैं, 'कभी घोड़ागाड़ी का वक्त था, अब मोटरसाइकिल का दौर है... 'भारत बदल रहा है, बुलंद बदल रहा है और बजाज भी...' यानि ये सुसर बाइकवा ज्यादा माइलेज देने के चक्कर में स्कूटर पर भारी पड़ गईं...

अब इन मैनेजमेंट गुरुओं को कौन समझाए, स्कूटर जैसा सुख हम पाएंगे कहां...इन हवा-हवाई बाइकों की गद्दी पर खुद ही अपनी उन (बाइक पर ज्यादातर पीछे वो...ही बैठती हैं) के साथ समा जाएं वो ही बड़ी बात है...बाकी सामान रखने की तो सोचो हीं नहीं...और स्कूटर...जनाब पीछे पत्नी (स्कूटर पर पीछे पत्नियां ही बैठती हैं... वो...नहीं)...बीच में एक बच्चा...आगे हैंडल को पकड़े एक बच्चा...आगे का स्टैंड और डिक्की सामान से ठसाठस...चलाने वाले की टांगों के नीचे दोनों तरफ लटकते सब्जियों के बड़े-बड़े थैले...हम इसी अंदाज़ में अपने चेतक महाराज को 18 साल से दौड़ा रहे हैं...कभी तो रतन टाटा की नज़र हमारे पर भी पड़ेगी...शायद तरस खाकर एक अदद नैनो रानी ही तोहफे में हमें भिजवा दें...अब भले ही बाद में एड में अपनी इस दरियादिली को कितना भी कैश कर ले, हमें कोई ऐतराज नहीं होगा...कसम उड़ानझल्ले की....स्टांप पर लिख कर देने को भी अपुन तैयार है...

हां तो लौटता हूं अपने बजाज पर...नंबर यू पी 15...9743...बच्चे इतने बड़े हो गए हैं कि स्कूटर पर हमारे साथ बैठना छोड़ दिया है...बैठना क्या छोड़ दिया, आगे हैंडल के साथ जब बिटिया खड़ी होती थी तो हमें स्कूटर चलाते हुए सिर्फ उसकी चोटी ही नज़र आती थी...सड़क नहीं...बार-बार यही कहते रहते थे....बेटी सिर थोड़ा नीचे...सिर थोड़ा नीचे...एक दिन झक मार के बिटिया ने ऐलान कर दिया लो अब मैं स्कूटर पर कभी चढ़ूंगी ही नहीं...तो जनाब अब मैं और मेरा बजाज...अक्सर ये बाते किया करते हैं...बाते क्या करते हैं स्कूटर ही मुझे संघर्ष फिल्म के दिलीप कुमार की तरह ताने दिया करता है....एक एक करके सब तो आपका साथ छोड़ कर चले गए...एक मैं ही हूं जो साथ दिेए जा रहा हूं....


ये मेरा स्कूटर नहीं है, नेट से ली गई फोटो है...लेकिन कसम से मेरे वाला भी कंपीटिशन में
इस स्कूटर की हालत से कम नहीं है
साथ भी कितना गजब का दिया है साहब...पत्नी लाख हमें मार्निंग वॉक के फायदे समझाती रहती है लेकिन मजाल है कि हम ब्लॉगिंग का परम सुख छोड़कर सुबह कभी सैर पर निकल जाए...लेकिन ये स्कूटर महाराज...इनके आगे हमारा बस भी नहीं चलता...पहले तो ये स्टार्ट होने का नाम ही नहीं लेते...लाख टेढ़ा-मेढ़ा कर लो पर ये इंजन का मधुर राग तभी सुनाएंगे जब इनकी मर्जी हो...अक्सर हम किक मार-मार कर हलकान होते रहते हैं पर चिकने घड़े की तरह स्कूटर जी पर कोई असर नहीं पड़ता...किक मारते मारते जब तक मुंह से हमारी जीभ को बाहर आए निकला न देख ले...ये शुरू नहीं होते...जीभ देखकर जब इन्हें तसल्ली हो जाती है कि हमने ब्रश के साथ टंग-क्लीनर का भी इस्तेमाल किया है, तभी ये अपने ऊपर हमें सवारी गांठने का मौका देते हैं....हां, पत्नी को पता चले न चले लेकिन हमारे स्कूटर महाराज को हमारे वजन से तड़ाक पता चल जाता है कि आज हमने बाज़ार में कुछ पेट फुलाऊ खाने की चीज़ों पर हाथ साफ किया है....रास्ते में चलते-चलते बंद हो जाते हैं....फिर हमें इन्हें कई किलोमीटर खींचना पड़ता है...और जब स्कूटर महाराज जी को ये भरोसा हो जाता है कि हमने जो खाने में एक्स्ट्रा कलरी हड़पी थीं वो सब हजम हो गई हैं तब अचानक झट से स्टार्ट हो जाते हैं...देखा मेरी सेहत का कितना ख्याल...

एक फायदा और सुनिए...अपने राम कभी स्कूटर में ताला नहीं लगाते...(लगाए कहां से चाबी ही पिछले कई सालों से खोई हुई है)...और दावा है कि स्कूटर को कहीं भी खड़ा कर दे, मजाल है कि कोई चोर उसकी तरफ बुरी नज़र उठा कर देखे...हमारे स्कूटर जी माशाअल्लाह है ही इतनी सुंदर हालत में...इतनी बढ़िया कंडीशन में कि चोर भी आएगा तो स्कूटर पर सौ का नोट इस नोट के साथ रखकर चला जाएगा...अबे साले कभी तो सर्विस करा लिया कर...

तो जनाब ऐसा है मेरा बजाज...बेशक स्कूटर की बॉ़डी टेढ़ी हो गई है...स्टैंड वक्त के थपे़ड़ों को सहते-सहते गल कर गिरने को तैयार है...लेकिन टेढ़ा है तो क्या...है तो मेरा है...अब बजाज खुद ही एंटीक के तौर पर मेरे बजाज के लिए लाखों रुपये भी देने को तैयार हो तो क्या, मैं अपने इस जिगर के टुकड़े को बेचना तो दूर इसकी तस्वीर भी कोई न दूं...


स्लॉग ओवर
एक बार नासा (नशा नहीं अमेरिका का स्पेस शटल उड़ाने वाला नासा) वाले परेशान हो गए...कोलंबिया स्पेस शटल उड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था...साइंसदानों ने अक्ल के लाख घोड़े दौड़ा लिए पर कोलंबिया टस से मस होने को तैयार नहीं...झक मार कर दुनिया भर के अखबारों में ऐलान कर दिया कि जो भी इस काम में मदद करेगा उसे लाखों डॉलर ईनाम में दिए जाएंगे...इस ऐलान पर अपने मक्खन की भी नज़र पड़ गई...झट से एंबेसी वालों को फोन लगा दिया...मैं उड़ा सकता हूं कोलंबिया...

लो जी...आनन फानन में सारे अरेंजमेट कर मक्खन जी को फ्लोरिडा में नासा के हेडक्वार्टर पहुचा दिया गया...साइंसदान मक्खन को कोलंबिया के मुआयने के लिए ले गए...मक्खन ने इंस्पेक्शन के बाद इंस्ट्र्क्शन दी....कोलंबिया को थोड़ा बाईं और झुकाओ...फिर कहा...अब इसे दाईं ओर झुकाओ...बस अब सीधा खड़ा कर दो और स्टार्ट करो....

कंट्रोल रूम ने मक्खन के आदेश का पालन किया...ये क्या...कोलंबिया स्टार्ट हुआ और आसमान में ये जा और वो जा....हर तरफ तालियां गूंज उठी....मक्खन जी हीरो बन गए..व्हाइट हाउस में डिनर के लिए मक्खन जी को बुलाया गया...वहां अमेरिकी प्रेसीडेंट ने पूछ ही लिया...मक्खन जी हमारी पूरी साइंस फेल हो गई...आखिर आपने कैसे कोलंबिया को उड़ा दिया....मक्खन का जवाब था...ओ नहीं जी कमाल-वमाल कुछ नहीं...मेरा बीस साल पुराना लैम्ब्रेटा स्कूटर है...जब स्टार्ट नहीं होता तो ऐसा ही उसे टेढ़ा करता हूं...और फिर वो स्टार्ट हो जाता है....
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