खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

फिर टेढ़ा है, पर मेरा है...खुशदीप

मैं स्लॉग ओवर ब्लॉग पर नई पोस्ट के साथ अपने सारे पुराने व्यंग्य भी एक ही जगह लाने का प्रयास कर रहा हूं...ये वाली पोस्ट मैंने  12 Dec 2009  को लिखी थी...इसके बाद भी ब्लॉगवुड से काफ़ी नए पाठक जुड़े...उनकी खिदमत में ही पेश कर रहा हूं...

बुधवार से मन बड़ा खराब चल रहा है...वजह है हमारा बजाज...टेढ़े बजाज का खटारा खटराग...लोगबाग बेशक उसे स्कूटर कहने की गुस्ताखी करते हैं लेकिन हमारे लिए तो वो अश्वराज चेतक से कम नहीं...पिछले 18 साल से जब भी ये चेतक महाराज मुझे सवारी कराते रहे हैं, मुझे यही लगता है कि राणा प्रताप की आत्मा मेरे अंदर आ गई है...वो तो मूंछे नहीं रखी हुई, नहीं तो चेतक की हर उड़ान पर कलफ की तरह ही कड़क हो जाया करती और गाना गाया करती...हमरी ना मानो तो बजजवा से पूछो...(सुन रहे हैं न ललित शर्मा भाई...)

आप पूछेंगे कि ये सुबह-सुबह कौन सा वीत-राग ले बैठा...ओ बजाज जी, तेरे ऐलान ने बड़ा दुख दीना...अब आप कहेंगे...कौन बजाज...अरे वही बजाज जो कल तक बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर दिखाते रहते थे...हमारा बजाज, हमारा बजाज करते रहते थे...इन बजाजों ने बुधवार को ऐलान कर दिया कि स्कूटर कारोबार को पूरी तरह राम-राम करने जा रहे हैं....अब इन बजजवों को कौन याद दिलाए इनके एड के वो जिंगल, जिनमें कस्मे-वादे किए जाते थे कि बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर आज भी और कल भी हमारे साथ रहेगी... देश की दो पीढ़ियां इस जिंगल को गुनगुनाते हुए ही जवानी से सठियाने की दहलीज पर आ गईं और अचानक ये अलविदा-अलविदा के सुर छेड़ने लगे (लगता है इन्हें भी ब्लॉगरी के ताजा जिन्न ने जकड़ लिया है)...

तो जनाब ये बजाज वाले कह रहे हैं कि उनके स्कूटर के सभी जाने-माने मॉडलों पर परदा गिरने की घड़ी आ गई है..कंपनी ने तीन साल पहले ही चेतक मॉडल बनाना बंद कर दिया था...बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज के मुताबिक इस कारोबारी साल के अंत तक कंपनी क्रिस्टल सीरीज के स्कूटर का उत्पादन भी बंद कर देगी...1980 के दशक में 'हमारा बजाज' कर्मशियल्स बनाने वाली ऐड एजेंसी लोवे इंडिया के चेयरमैन आर बाल्की कहते हैं, 'कभी घोड़ागाड़ी का वक्त था, अब मोटरसाइकिल का दौर है... 'भारत बदल रहा है, बुलंद बदल रहा है और बजाज भी...' यानि ये सुसर बाइकवा ज्यादा माइलेज देने के चक्कर में स्कूटर पर भारी पड़ गईं...

अब इन मैनेजमेंट गुरुओं को कौन समझाए, स्कूटर जैसा सुख हम पाएंगे कहां...इन हवा-हवाई बाइकों की गद्दी पर खुद ही अपनी उन (बाइक पर ज्यादातर पीछे वो...ही बैठती हैं) के साथ समा जाएं वो ही बड़ी बात है...बाकी सामान रखने की तो सोचो हीं नहीं...और स्कूटर...जनाब पीछे पत्नी (स्कूटर पर पीछे पत्नियां ही बैठती हैं... वो...नहीं)...बीच में एक बच्चा...आगे हैंडल को पकड़े एक बच्चा...आगे का स्टैंड और डिक्की सामान से ठसाठस...चलाने वाले की टांगों के नीचे दोनों तरफ लटकते सब्जियों के बड़े-बड़े थैले...हम इसी अंदाज़ में अपने चेतक महाराज को 18 साल से दौड़ा रहे हैं...कभी तो रतन टाटा की नज़र हमारे पर भी पड़ेगी...शायद तरस खाकर एक अदद नैनो रानी ही तोहफे में हमें भिजवा दें...अब भले ही बाद में एड में अपनी इस दरियादिली को कितना भी कैश कर ले, हमें कोई ऐतराज नहीं होगा...कसम उड़ानझल्ले की....स्टांप पर लिख कर देने को भी अपुन तैयार है...

हां तो लौटता हूं अपने बजाज पर...नंबर यू पी 15...9743...बच्चे इतने बड़े हो गए हैं कि स्कूटर पर हमारे साथ बैठना छोड़ दिया है...बैठना क्या छोड़ दिया, आगे हैंडल के साथ जब बिटिया खड़ी होती थी तो हमें स्कूटर चलाते हुए सिर्फ उसकी चोटी ही नज़र आती थी...सड़क नहीं...बार-बार यही कहते रहते थे....बेटी सिर थोड़ा नीचे...सिर थोड़ा नीचे...एक दिन झक मार के बिटिया ने ऐलान कर दिया लो अब मैं स्कूटर पर कभी चढ़ूंगी ही नहीं...तो जनाब अब मैं और मेरा बजाज...अक्सर ये बाते किया करते हैं...बाते क्या करते हैं स्कूटर ही मुझे संघर्ष फिल्म के दिलीप कुमार की तरह ताने दिया करता है....एक एक करके सब तो आपका साथ छोड़ कर चले गए...एक मैं ही हूं जो साथ दिेए जा रहा हूं....


ये मेरा स्कूटर नहीं है, नेट से ली गई फोटो है...लेकिन कसम से मेरे वाला भी कंपीटिशन में
इस स्कूटर की हालत से कम नहीं है
साथ भी कितना गजब का दिया है साहब...पत्नी लाख हमें मार्निंग वॉक के फायदे समझाती रहती है लेकिन मजाल है कि हम ब्लॉगिंग का परम सुख छोड़कर सुबह कभी सैर पर निकल जाए...लेकिन ये स्कूटर महाराज...इनके आगे हमारा बस भी नहीं चलता...पहले तो ये स्टार्ट होने का नाम ही नहीं लेते...लाख टेढ़ा-मेढ़ा कर लो पर ये इंजन का मधुर राग तभी सुनाएंगे जब इनकी मर्जी हो...अक्सर हम किक मार-मार कर हलकान होते रहते हैं पर चिकने घड़े की तरह स्कूटर जी पर कोई असर नहीं पड़ता...किक मारते मारते जब तक मुंह से हमारी जीभ को बाहर आए निकला न देख ले...ये शुरू नहीं होते...जीभ देखकर जब इन्हें तसल्ली हो जाती है कि हमने ब्रश के साथ टंग-क्लीनर का भी इस्तेमाल किया है, तभी ये अपने ऊपर हमें सवारी गांठने का मौका देते हैं....हां, पत्नी को पता चले न चले लेकिन हमारे स्कूटर महाराज को हमारे वजन से तड़ाक पता चल जाता है कि आज हमने बाज़ार में कुछ पेट फुलाऊ खाने की चीज़ों पर हाथ साफ किया है....रास्ते में चलते-चलते बंद हो जाते हैं....फिर हमें इन्हें कई किलोमीटर खींचना पड़ता है...और जब स्कूटर महाराज जी को ये भरोसा हो जाता है कि हमने जो खाने में एक्स्ट्रा कलरी हड़पी थीं वो सब हजम हो गई हैं तब अचानक झट से स्टार्ट हो जाते हैं...देखा मेरी सेहत का कितना ख्याल...

एक फायदा और सुनिए...अपने राम कभी स्कूटर में ताला नहीं लगाते...(लगाए कहां से चाबी ही पिछले कई सालों से खोई हुई है)...और दावा है कि स्कूटर को कहीं भी खड़ा कर दे, मजाल है कि कोई चोर उसकी तरफ बुरी नज़र उठा कर देखे...हमारे स्कूटर जी माशाअल्लाह है ही इतनी सुंदर हालत में...इतनी बढ़िया कंडीशन में कि चोर भी आएगा तो स्कूटर पर सौ का नोट इस नोट के साथ रखकर चला जाएगा...अबे साले कभी तो सर्विस करा लिया कर...

तो जनाब ऐसा है मेरा बजाज...बेशक स्कूटर की बॉ़डी टेढ़ी हो गई है...स्टैंड वक्त के थपे़ड़ों को सहते-सहते गल कर गिरने को तैयार है...लेकिन टेढ़ा है तो क्या...है तो मेरा है...अब बजाज खुद ही एंटीक के तौर पर मेरे बजाज के लिए लाखों रुपये भी देने को तैयार हो तो क्या, मैं अपने इस जिगर के टुकड़े को बेचना तो दूर इसकी तस्वीर भी कोई न दूं...


स्लॉग ओवर
एक बार नासा (नशा नहीं अमेरिका का स्पेस शटल उड़ाने वाला नासा) वाले परेशान हो गए...कोलंबिया स्पेस शटल उड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था...साइंसदानों ने अक्ल के लाख घोड़े दौड़ा लिए पर कोलंबिया टस से मस होने को तैयार नहीं...झक मार कर दुनिया भर के अखबारों में ऐलान कर दिया कि जो भी इस काम में मदद करेगा उसे लाखों डॉलर ईनाम में दिए जाएंगे...इस ऐलान पर अपने मक्खन की भी नज़र पड़ गई...झट से एंबेसी वालों को फोन लगा दिया...मैं उड़ा सकता हूं कोलंबिया...

लो जी...आनन फानन में सारे अरेंजमेट कर मक्खन जी को फ्लोरिडा में नासा के हेडक्वार्टर पहुचा दिया गया...साइंसदान मक्खन को कोलंबिया के मुआयने के लिए ले गए...मक्खन ने इंस्पेक्शन के बाद इंस्ट्र्क्शन दी....कोलंबिया को थोड़ा बाईं और झुकाओ...फिर कहा...अब इसे दाईं ओर झुकाओ...बस अब सीधा खड़ा कर दो और स्टार्ट करो....

कंट्रोल रूम ने मक्खन के आदेश का पालन किया...ये क्या...कोलंबिया स्टार्ट हुआ और आसमान में ये जा और वो जा....हर तरफ तालियां गूंज उठी....मक्खन जी हीरो बन गए..व्हाइट हाउस में डिनर के लिए मक्खन जी को बुलाया गया...वहां अमेरिकी प्रेसीडेंट ने पूछ ही लिया...मक्खन जी हमारी पूरी साइंस फेल हो गई...आखिर आपने कैसे कोलंबिया को उड़ा दिया....मक्खन का जवाब था...ओ नहीं जी कमाल-वमाल कुछ नहीं...मेरा बीस साल पुराना लैम्ब्रेटा स्कूटर है...जब स्टार्ट नहीं होता तो ऐसा ही उसे टेढ़ा करता हूं...और फिर वो स्टार्ट हो जाता है....

8 टिप्पणियाँ:

Rakesh Kumar ने कहा…

खुशदीप भाई आपको रंग में आया देख ,मन तरंगित हों गया
टेडा करके स्कूटर स्टार्ट करता मक्खन भी पूजित हों गया
ये तो आपका ही कमाल है
वरना कोई स्कूटर चलता इतने साल है.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

हमारे पास भी ऐसा ही एक स्कूटर आराम फरमा रहा है। है हाफ किक स्टार्ट बस पहले एक बार तिरछा करना जरूरी है।
वैसे एक सवाल है, कोलंबिया का कारबुरेटर बजाज वालों ने सप्लाई किया था क्या?

Udan Tashtari ने कहा…

मेरा बजाज जबलपुर में खड़ा है....बेहद प्रेशर था बेचने को चलते समय...मगर नहीं बेचा...अब भी वहीं है.

Shah Nawaz ने कहा…

हमें भी हमारा बजाज ने काफी दिन ढोया है.... बस एक दिन देश से दूर जाना पड़ा था और तब हमारा नाता टूट गया था अपने 'बजाज' से...

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

आज यह सुनिश्चित हो गया कि आप एक बड़े ब्लॉगर हैं क्योंकि ब्लॉग जगत में यह सिद्धांत प्रचलित है कि ‘टेढ़ा है पर मेरा है की भावना से ओत-प्रोत होते हैं बड़े ब्लॉगर्स‘।
आपकी यह पोस्ट उसी सिद्धांत की पुष्टि करती है।
अभी अभी लखनऊ से लौटा हूं और सबसे पहले तो बधाई देने वालों को शुक्रिया अदा किया। बड़ी मुश्किल से तो दो-चार बंदे शुक्रिया कहने आए और अगर कहीं उन्हें भी थैंक्स न कहा तो अगली बार वे भी रूख़ न करेंगे। इसी क्रम में मक्खनबाज़ी हेतु आपके ब्लॉग पर भी एक टिप्पणी चिपकाने के लिए आ गया।
समय देखकर इस टिप्पणी का उधार आप अवश्य ही चुकता करेंगे। ऐसी सद्-आशा के साथ आपका भाई , अनवर जमाल !
... और हां,
ब्लॉग जगत की तमाम परेशान आत्माओं के नाम एक हर्ष संदेश
नाओ आए एम कूल एंड सैटिस्फ़ाई.
अब आप मुझे जैसे ढालना चाहें, ढाल लें,
सलाह और सुझाव आमंत्रित हैं,
अवधि मात्र 3 दिवस है।
ऐसा क्यों कह रहा हूं, यह भी एक पूरी पोस्ट का विषय है जो कि मैं बनाऊंगा नहीं। बस, सलाह दीजिए और पालन कराइये।
जय हिंद !

डा० अमर कुमार ने कहा…

.
हाय रे, हमरे तो अपना विजय सुपर ऎंवेंई एक ज़रूरतमँद को दान कर दी,
बाद में पता लगा कि वह उसे चमका कर पब्लिक डिसप्ले कर रहा है ।
अब तो वह मेरा फोन भी नहीं उठाता, खैर तेरी आपबीती भी अपने आप में अलग है !

एस.एम.मासूम ने कहा…

सीधा है पर मेरा है वाली भावना कब आएगी ?

किलर झपाटा ने कहा…

इतनी मजेदार पोस्ट लिखी है। टिप्पणी करने का मन भी है, मगर एक ही बात हमेशा आड़े आ जाती है कि आप तो उसे मिटा ही दोगे तो क्या फ़ायदा ?

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