खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

गुल्ली की गुगली...खुशदीप



गुल्ली की सोहबत कुछ गलत दोस्तों से हो गई...गली में उनके साथ गुल्ली महाराज ने फक्कड़ तौलने (गालियां देना) सीख लिए...एक दिन गुल्ली बाहर खेल कर घर वापस आया और अपनी टॉय ट्रेन लेकर बैठ गया...अब ट्रेन चक्कर काटने लगी...और गुल्ली रेलवे स्टेशन पर एनाउंसर की तरह एनाउंसमेंट करने लगा...

ये ट्रेन दिल्ली से इलाहाबाद जा रही है...जिन उल्लू के पठ्ठों को इसमें बैठना है, बैठ जाएं...बाकी अपने घर जाएं...

गुल्ली का ये एनाउंसमेंट तीन-चार बार चला तो मक्खन का ध्यान उसकी और गया...गुल्ली के मुखारबिंद से अपवचन सुनकर मक्खन के अंदर का पिता जाग गया...साथ ही सोया शेर भी....मक्खन ने गुल्ली का कान पकड़ा और सीधे बेडरूम में ले गया...अंदर से दरवाज़ा बंद कर गुल्ली की खूब खबर ली...ठुकाई के साथ समझाया भी...दूसरों के लिए इस तरह की गंदी बात आगे से जुबान पर कभी नहीं लाना...नहीं तो ज़ुबान काट लूंगा...

एक घंटा तक क्लास लेने के बाद मक्खन बाहर आ गया...थोड़ी देर बाद गुल्ली भी बाहर आ गया...अब गुल्ली ठहरा गुल्ली...मक्खन का पुतर...चिकना घड़ा...अपनी टॉय ट्रेन लेकर फिर शुरू हो गया...साथ ही एनाउंसमेंट भी होने लगा...

ये ट्रेन दिल्ली से इलाहाबाद जा रही है...जिन भाईसाहब को इसमें बैठना है जल्दी से बैठ जाएं, क्योंकि ये ट्रेन पहले ही एक उल्लू के पठ्ठे की वजह से एक घंटा लेट हो चुकी है...

(नोट किया जाए- अब गुल्ली ने किसी दूसरे या बाहर वाले के लिए अपशब्द का इस्तेमाल नहीं किया)

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Funniest joke- Makkhan, Dakkan and Gabbar

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उम्र न पूछो मैडम की...खुशदीप



कहते हैं किसी से उम्र नहीं पूछनी चहिये,...आजकल महिलाएं तो महिलाएं, पुरुष भी असली  उम्र बताने से कतराते हैं...

पेज थ्री टाइप फैशन डिजाइनर एक मोहतरमा मेकअप से सराबोर होकर रियल्टी टीवी के एक चैट शो में पहुंची...साथ में जवान बेटी...शो की होस्ट ने एक सवाल में फैशन डिजाइनर मोहतरमा की उम्र पूछ ली...

अब पूरा देश शो देख रहा था...सही उम्र कैसे बता दी जाए 45...नो नो...इट्स 40...एक्चुअली 35 है...वन मोर करेक्शन 30...फाइनली 25...

तभी साथ जवान बेटी ने धीरे से मां के कान में कहा...मॉम, उम्र जितनी मर्जी कम बताओ, बस अपनी और मेरी उम्र के बीच नौ महीने का फ़र्क ज़रूर रख लेना...


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License to rupture in laughter...हँसना मना है...Khushdeep
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मक्खन का भजन...खुशदीप

मक्खन के पड़ोस में एक दक्षिण भारतीय परिवार रहने के लिए आ गया...नया पड़ोसी मेलजोल बढ़ाने के नाते मक्खन के घर आया और बोला...अइयो, कल अमारे घर भोजन होता जी...आप को पूरा फैमिली के साथ आने को मांगता जी...

मक्खन ने भी अच्छे पड़ोसी का धर्म निभाते हुए न्यौता स्वीकार कर लिया...अगले दिन मक्खन, पत्नी मक्खनी और बेटा गुल्ली सज-धज कर नये प़ड़ोसी के घर पहुंच गए...वहां पूजा-पाठ चल रहा था...मक्खन का परिवार भी साथ बैठ गया...दो घंटे तक पूजा-पाठ चलता रहा...लेकिन मक्खन के दिमाग में दक्षिण भारतीय व्यजंन ही चक्कर काट रहे थे...



पूजा खत्म होने के बाद दक्षिण भारतीय पड़ोसी मक्खन के पास आया और बोला...अइयो...अमको बोत अच्छा लगा जी आप का पूरा फैमिली हमारे साथ भोजन में हिस्सा लिया...नये पड़ोसी ने ये कहने के बाद भोजन के प्रसाद के तौर पर एक एक बतासा मक्खन, मक्खनी और गुल्ली के हाथ पर धर दिया...

अब मक्खन घर लौटते सोच रहा था...भोजन या भजन...
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