खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

मक्खन का भजन...खुशदीप

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  • Khushdeep Sehgal
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  • मक्खन के पड़ोस में एक दक्षिण भारतीय परिवार रहने के लिए आ गया...नया पड़ोसी मेलजोल बढ़ाने के नाते मक्खन के घर आया और बोला...अइयो, कल अमारे घर भोजन होता जी...आप को पूरा फैमिली के साथ आने को मांगता जी...

    मक्खन ने भी अच्छे पड़ोसी का धर्म निभाते हुए न्यौता स्वीकार कर लिया...अगले दिन मक्खन, पत्नी मक्खनी और बेटा गुल्ली सज-धज कर नये प़ड़ोसी के घर पहुंच गए...वहां पूजा-पाठ चल रहा था...मक्खन का परिवार भी साथ बैठ गया...दो घंटे तक पूजा-पाठ चलता रहा...लेकिन मक्खन के दिमाग में दक्षिण भारतीय व्यजंन ही चक्कर काट रहे थे...



    पूजा खत्म होने के बाद दक्षिण भारतीय पड़ोसी मक्खन के पास आया और बोला...अइयो...अमको बोत अच्छा लगा जी आप का पूरा फैमिली हमारे साथ भोजन में हिस्सा लिया...नये पड़ोसी ने ये कहने के बाद भोजन के प्रसाद के तौर पर एक एक बतासा मक्खन, मक्खनी और गुल्ली के हाथ पर धर दिया...

    अब मक्खन घर लौटते सोच रहा था...भोजन या भजन...

    6 टिप्पणियाँ:

    Ruchika Sharma ने कहा…

    हा हा...बेचारा मक्‍खन

    हंसी के फव्‍वारे

    Sushil Bakliwal ने कहा…

    बहुत नाईन्साफी हो गई ये तो मक्खन परिवार पर.

    कल देशनामा ब्लाग हर संभव प्रयत्न करने के बाद भी खुल नहीं पाया ।

    दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

    मक्खन के साथ जो गुजरी सो गुजरी। मक्खनी के साथ और भी बुरी गुजरी होगी। घर आ कर भोजन बनाना पड़ा होगा।

    Shah Nawaz ने कहा…

    हा हा हा... बेचारा मक्खन परिवार... :-) :-) :-)

    Jyoti Mishra ने कहा…

    hilarious !!

    Vivek Jain ने कहा…

    मजेदार,
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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