खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

निखट्टू बेटा, लेकिन बाप खुश, कैसे भला...खुशदीप

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  • Khushdeep Sehgal
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  • दो निखट्टू लेकिन मस्तमौला लड़के पार्क में बैठे बातें कर रहे थे...तभी एक लड़का बोला....यार आजकल बाप ने बड़ा परेशान कर रखा है...दिन भर ताने देता रहता है...न काम का न काज का , ढाई मन अनाज का...क्या करूं यार घर में एक मिनट बैठना भी हराम कर रखा है...

    इस पर दूसरा वाला लड़का बोला...यार मेरा बाप तो मुझसे बड़ा खुश है...

    पहला वाला लड़का हैरानी से बोला...भला वो कैसे...

    इस पर दूसरा लड़का बोला...यार मैं सुबह अंधेरे मुंह उठकर ही गुलेल लेकर निकल जाता हूं...और रोज़ नई कॉलोनी में जाकर शीशे तोड़ आता हूं...

    इस पर पहले वाले लड़के ने टोका...तो फिर तेरा बाप कैसे खुश हो जाता है...

    दूसरे वाले ने कहा...समझा कर यार, मेरे बाप का ग्लासवेयर का शोरूम है...सब लोग नए शीशे खरीदने मेरे बाप की दुकान पर ही आते हैं...इससे उसका धंधा चोखा चल रहा है...वो भी खुश, मैं भी खुश...

    ये सुनकर पहले वाला लड़का ठंडी सांस लेकर रोने लगा...

    दूसरे वाले ने कहा...तू रो क्यों रहा है...तू भी अपने बाप का धंधा मुझे बता...फिर मैं भी तुझे कोई तरकीब बता देता हूं...

    ये सुनकर पहले वाला लड़का और ज़ोर से रोते हुए कहने लगा...रहने दे यार तू भी मेरी कोई मदद नहीं कर सकता...

    दूसरे वाले लड़के ने धीरज बंधाते हुए कहा...अरे तू मुझे नहीं जानता...मेरे पास हर चीज़ का तोड़ है, तू बस मुझे अपने बाप का धंधा बता...

    इस पर पहले वाला लड़का हिचकी लेते हुए धीरे से बोला....मेरे बाप का मैट्रिनिटी होम है...

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