खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

भोजपुरी में "मिशन इंपॉसिबल"...खुशदीप

हॉलीवुड की फिल्म "मिशन इंपॉसिबल" अगर भोजपुरी में बनती तो उसका क्या नाम होता...
 
 
 
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"ई ना हो पाई भय्या"
 
और अगर "मिशन इंपॉसिबल 2 " का भोजपुरी रीमेक भी बनता तो उसका क्या नाम होता...
 
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"हम फिर से कह रही ई ना हो पाई भय्या"
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भगवान को किससे लग रहा है डर...खुशदीप

एक बच्चा भगवान से प्रार्थना कर रहा था....

भगवान, मेरी विनती सुन लो, दो साल से फेल हो रहा हूं, इस साल पास करा दो तो 101 रुपये का प्रसाद चढ़ाऊंगा...................................................................................................................................
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भगवान ने जवाब दिया...श...श....क्या करता है मूर्ख...मुझे भी फंसाएगा क्या...

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अन्ना सुन लेंगे...
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मक्खन द ग्रेट सेल्समैन...खुशदीप

मक्खियां मारते मारते मक्खन आजिज आ गया...सोचा कहीं नौकरी कर ली जाए...लेकिन मक्खन को नौकरी देता कौन...मक्खन ने अपना जैसा ही मुफलिस दुकानदार ढूंढ लिया...दुकान के बारह बजे हुए थे लेकिन उसका मालिक खुद को सेठ कहलाना ही पसंद करता था...दुकान पर ज़्यादा सामान तो कुछ था नहीं...ग्राहक जो मांगते वो मुश्किल से ही दुकान पर निकलता...अब ऐसे में मक्खन को ज़्यादातर ग्राहकों को खाली हाथ ही लौटाना पड़ता...



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एक दो दिन कंगाल सेठ ये देखता रहा...फिर उसने मक्खन को बुला कर समझाया...अच्छा सेल्समैन वो होता है जो ग्राहक को ज़रूरत हो या न हो कुछ न कुछ बेच ही देता है...खाली हाथ दुकान से नहीं लौटने देता...

मक्खन ने सेठ की ये नसीहत गिरह से बांध ली...और ग्राहक का इंतज़ार करने लगा...मुश्किल से एक ग्राहक आया...

ग्राहक...क्या टॉयलेट पेपर मिलेंगे...

मक्खन....टॉयलेट पेपर तो आज ही खत्म हुए हैं...लेकिन मेरे पास उससे भी बेहतर चीज़ है...दे दूं क्या...

ग्राहक....वो क्या है भला...

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मक्खन.... रेगमार (Sand-Paper)
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मक्खन का फ़ायदा...खुशदीप

 
 
मक्खन का फ़ायदा...
 
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मक्खन मक्खनी से...तुझसे शादी करके मुझे एक बहुत बड़ा फ़ायदा हुआ है...मैं सीधे स्वर्ग जाऊंगा...

मक्खनी खुश हो के...रहने दो मेरी इतनी तारीफ भी न करो...स्वर्ग कैसे जाओगे भला...

मक्खन...स्वर्ग ही तो जाऊंगा क्योंकि मेरे सारे पिछले जन्मों के पापों की सज़ा तो धरती पर इसी जन्म में मिल गई...तुझ से शादी करके...
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भाभी से ख़फ़ा मक्खन...खुशदीप

मक्खन गुस्से में लाल-पीला हो रहा था..

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भाई के घर जाकर उसने अपनी भाभी को बहुत बुरा-भला कहना शुरू कर दिया...
सबने रोका लेकिन मक्खन का पारा नीचे आने का नाम ही नहीं ले रहा था...
ढक्कन को पता चला तो वो भी मक्खन का गुस्सा शांत करने के लिए पहुंच गया...
ढक्कन मक्खन को कोने में ले जाकर बोला...आखिर बता तो सही तुझे भाभी से गुस्सा किस बात का है...
मक्खन...क्या बताऊं...आजकल जिस किसी दोस्त को भी फोन पर बात करते देख कर पूछता हूं कि किससे बात कर रहा है, तो सभी का एक ही जवाब होता है...

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तेरी भाभी से....
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गर्लफ्रैंड की मक्खन से डिमांड...खुशदीप






मक्खन से गर्लफ्रैंड ने आइसक्रीम खिलाने की डिमांड की..................................................

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मक्खन आइसक्रीम खरीद लाया...

गर्लफ्रैंड ने कहा...थैंक यू...

मक्खन...सिर्फ थैंक यू...

गर्लफ्रैंड...मुझे पता है तुम क्या चाहते हो...किस न...

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मक्खन...चुप कर भूखी...जल्दी से आधी आइसक्रीम मुझे दे...
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लवगुरु मक्खन का फंडा...खुशदीप


लवगुरु मक्खन का फंडा..................................................................................................................................................................................................................................................................................




ढक्कन से मक्खन...लड़की फंसानी आती है...

ढक्कन...नहीं आती गुरु...

मक्खन...तो सीख, पहले कागज़ का एक जहाज़ बना...फिर उसे क्लास में उड़ा...

ढक्कन...क्या बात कर रहा है...

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मक्खन...जब मैडम पूछे किसने की ये हरकत तो बस झट से लड़की का नाम लगा दे...

बस फंस गई लड़की...
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इतनी सी बात पर क्यों बुला लिया...खुशदीप



राम और रावण में भीषण युद्ध चल रहा था...

देखने वाले हर शख्स की सांसें रुकी हुई थीं...

तभी अचानक रावण की नज़र राम के पीछे खड़े एक शख्स पर पड़ी जो मंद मंद मुस्कुरा रहा था...

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रावण एकदम से युद्ध छोड़कर खड़ा हो गया और बोला...चलो हो गया, मैं चलता हूं...

राम भी हैरान, पूछा...आखिर हुआ क्या...

रावण...कुछ नहीं, जाने दो, बस यूहीं...

राम...अरे बताओ तो सही क्या बात है...

रावण...इतनी छोटी सी बात पर 'रजनीकांत' को बुलाने की क्या ज़रूरत थी...
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मक्खन का दर्द...Khushdeep

मक्खन बस पर चढ़ने लगा...

ऊपर से आवाज़ आई...इस बस पर मत चढ़, ये खाई में गिर जाएगी...

मक्खन को खटका हुआ, बस छोड़कर रेलवे स्टेशन पहुंचा...ट्रेन पर चढ़ने लगा...

ऊपर से फिर आवाज़ आई...इस ट्रेन पर मत चढ़, ये दूसरी ट्रेन से भिड़ जाएगी...

मरता क्या न करता, मक्खन एयरपोर्ट पहुंच गया...प्लेन पर चढ़ने लगा...

फिर ऊपर से आवाज़... इस प्लेन पर मत चढ़...ये समुद्र में क्रैश....

अभी ऊपर वाले की आवाज़ पूरी भी नहीं हुई थी कि मक्खन ने भन्ना कर पूछा....ओए तू है कौण....

ऊपर से आवाज़...मैं भगवान हूं...

मक्खन....ते ओस दिन कित्थे सुत्ता होया सी, जिस दिन मैं घोड़ी चढण लगया सी...
(तो उस दिन कहां सोया हुआ था जिस दिन मैं घोड़ी चढ़ने लगा था)


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मक्खन की मासूमियत...खुशदीप

आप सब जानते ही हैं कि मक्खन कितना मासूम है...अगर किसी को अब भी शक है तो आज जो किस्सा सुनाने जा रहा हूं, उससे सबको पक्का यकीन हो जाएगा...आगे से फिर कोई मक्खन की मासूमियत के साथ समझदारी पर भी उंगली नहीं उठाएगा....

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पार्टी से टुन लौट रहे मक्खन ने घर पर मक्खनी को फोन किया...

घर नहीं आ सकता, गाड़ी का स्टीयेरिंग, गियर, ब्रेक सब चोरी हो गया है...



एक घंटे बाद...

मक्खन का फिर मक्खनी को फोन...---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

आ रहा हूं, गलती से गाड़ी की पिछली सीट पर बैठा हुआ था...
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गर्लफ्रेंड, सिंधी और सयानापन...खुशदीप



व्यापार में सिंधी समुदाय का कोई सानी नहीं होता...कम से कम लागत में ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने की कला में ये माहिर होते हैं...लेकिन कारोबार के इसी सेंस का अगर प्यार में भी इस्तेमाल किया जाने लगे तो क्या नतीजा सामने आता है ये सिंधी बाप-बेटे की बातचीत से जानिए....

बाप...बेटा गर्लफ्रेंड के साथ घूमने गयो थे, पैसा-वैसा जादा तो खर्चा नहीं की नी..

बेटा...नहीं बापू जी, सिर्फ ढाई सौ रुपये...

बाप आश्चर्य से...ढाई...सौ....रु.....प....य्ययययययये....

बेटा...क्या करता बापू जी, गर्लफ्रेंड के पास थे ही सिर्फ ढाई सौ रुपये...

बाप....जय झूले लाल, जय झूले लाल...
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मक्खन और एमबीए...खुशदीप



मक्खन एक दिन पेड़ की डाल पर चढ़ा हुआ था...
इधर से उधर होता मक्खन किसी कंपनी के सीईओ की तरह हाव-भाव दिखा रहा था...
कभी किसी को इंस्ट्रक्शन देता...
कभी मोबाइल पर किसी को डांटता...
घंटों ये नज़ारा चलता रहा...
फिर मक्खन के दोस्त ढक्कन ने ही सारी बात साफ की....
दरअसल मक्खन की बड़ी इच्छा थी कि वो भी आईआईएम, अहमदाबाद से एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद लाखों की सेलरी का पैकेज ले...
लेकिन एमबीए का एन्ट्रेस पास करना कोई खालाजी का घर नहीं था...
मक्खन जी लाख कोशिश करने के बाद भी एन्ट्रेस टेस्ट पास नहीं कर पाए...
फिर क्या था बचा-खुचा जो दिमाग था वो भी हिल गया....
और...
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मक्खन जी बगैर एमबीए हुए ही अपने को ब्रांच मैनेजर समझने लगे....
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