खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

गर्लफ्रेंड, सिंधी और सयानापन...खुशदीप

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  • Khushdeep Sehgal
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  • व्यापार में सिंधी समुदाय का कोई सानी नहीं होता...कम से कम लागत में ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने की कला में ये माहिर होते हैं...लेकिन कारोबार के इसी सेंस का अगर प्यार में भी इस्तेमाल किया जाने लगे तो क्या नतीजा सामने आता है ये सिंधी बाप-बेटे की बातचीत से जानिए....

    बाप...बेटा गर्लफ्रेंड के साथ घूमने गयो थे, पैसा-वैसा जादा तो खर्चा नहीं की नी..

    बेटा...नहीं बापू जी, सिर्फ ढाई सौ रुपये...

    बाप आश्चर्य से...ढाई...सौ....रु.....प....य्ययययययये....

    बेटा...क्या करता बापू जी, गर्लफ्रेंड के पास थे ही सिर्फ ढाई सौ रुपये...

    बाप....जय झूले लाल, जय झूले लाल...

    5 टिप्पणियाँ:

    Shah Nawaz ने कहा…

    :-)

    एस.एम.मासूम ने कहा…

    कल कि चर्चा मंच पे आपकी इस गर्ल फ्रेंड का ज़िक्र किया है. :)

    राज भाटिय़ा ने कहा…

    सिंधी ओर यहुदी दोनो ही भाई भाई हे.... जय झुले लाल...:) किसी सिंधी से दोस्ती तो जरुर करो, लेकिन हमेशा कंगाल बन कर उस के साथ जाओ...

    चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

    ha-ha-ha

    वन्दना ने कहा…

    हा हा हा

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