खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

मक्खन की मासूमियत...खुशदीप

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  • Khushdeep Sehgal
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  • आप सब जानते ही हैं कि मक्खन कितना मासूम है...अगर किसी को अब भी शक है तो आज जो किस्सा सुनाने जा रहा हूं, उससे सबको पक्का यकीन हो जाएगा...आगे से फिर कोई मक्खन की मासूमियत के साथ समझदारी पर भी उंगली नहीं उठाएगा....

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    पार्टी से टुन लौट रहे मक्खन ने घर पर मक्खनी को फोन किया...

    घर नहीं आ सकता, गाड़ी का स्टीयेरिंग, गियर, ब्रेक सब चोरी हो गया है...



    एक घंटे बाद...

    मक्खन का फिर मक्खनी को फोन...---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

    आ रहा हूं, गलती से गाड़ी की पिछली सीट पर बैठा हुआ था...

    2 टिप्पणियाँ:

    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

    यानी मक्खन टुन्न हो कर मासूम हो जाते हैं।

    महेन्द्र मिश्र ने कहा…

    टुन्नस में मख्खन ... ...हा हा

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