खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

पठान का इंटरव्यू...खुशदीप



एक पठान साहब इंटरव्यू देने के लिए गए...

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इंटरव्यू लेने वाले ने पहला सवाल पूछा...आबू धाबी कहां हैं...
पठान ने जवाब दिया...

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वल्लाह जिस कब्रिस्तान में हमारा अम्मी दाबी, वहीं थोड़ा दूर पर अब्बू दाबी...
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पेड़ के पीछे 'संस्कृति'...खुशदीप



एक लड़का गर्ल-फ्रैंड के साथ पार्क में बेंच पर बैठा था...

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सैर पर निकले एक बुज़ुर्ग ने ये नज़ारा देखा तो बोले बिना नहीं रह सके...

बेटे, क्या यही हमारी 'संस्कृति' है...

लड़का...नहीं अंकल ये तो 'रीति' है,

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आप उस पेड़ के पीछे चेक करें...
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मक्खन को गुस्सा क्यों आता है...खुशदीप



मक्खन ट्रेन पर यात्रा के लिए निकला...

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ट्रेन पर चढ़ा...वहां चेतावनी लिखी हुई थी...

बिना टिकट यात्रा करने वाले होशियार !

मक्खन....वाह वो होशियार...

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और हम टिकट लेने वाले क्या हैं...उल्लू के पट्ठे !...
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गाली की परिभाषा...खुशदीप


दिल्ली के कालेज स्टूडेंट्स गालियों के लिए बहुत बदनाम है...डेहली बैली में आमिर ख़ान इसका मुज़ाहिरा कर भी चुके हैं...लेकिन हिंदी दिवस पर भाषा के विकृत होने पर एक संस्था ने सेमिनार कराया...वहां गालियों का मुद्दा भी उठा...
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एक सज्जन ने पूछा...आखिर गाली की परिभाषा क्या है...इसका जवाब एक छात्र ने इस तरह दिया...


क्रोध की परिस्थिति में मुखारबिंदु से निकला अशुद्ध और असंसदीय शब्दों का समुच्चय, जिनके प्रस्फुटन के बाद ह्दय को असीम शांति का अनुभव होता है...
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गुल्ली को हुआ बर्ड-फ्लू...खुशदीप



टीचर नाराज़ होकर गुल्ली से....इतने दिन से कहां थे, स्कूल क्यों नहीं आ रहे थे...

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गुल्ली... मैडम जी, मुझे बर्ड-फ्लू हो गया था...

टीचर...बर्ड फ्लू...ये तो बर्डस को ही होता है...

गुल्ली...

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मैडम जी, आपने मुझे इनसान रहने ही कहां दिया है...रोज़ स्कूल आने पर आप मुझे मुर्गा ही तो बनाती रहती हो....
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मक्खनी ने पूछा मक्खन से...खुशदीप





मक्खनी प्यार से मक्खन से बोलते हुए...

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सुनो जी डॉक्टर ने मुझे एक महीना आराम के लिए कहा है...साथ ही हवा पानी बदलने के लिए स्वित्ज़रलैंड या पेरिस जाने की सलाह दी है...हम कहाँ जाएंगे....

मक्खन ने पलक झपकते ही जवाब दिया...

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दूसरे डॉक्टर के पास....
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मक्खन, चाइनीज़ और अमेरिकन...खुशदीप




मक्खन एक चाइनीज़ से....क्या तुम अमेरिकन हो...

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चाइनीज़...नहीं मैं चाइनीज़ हूं...

मक्खन...नहीं तुम अमेरिकन हो...

चाइनीज़...नहीं, नहीं मैं चाइनीज़ हूं...

मक्खन...नहीं मुझे पता है, तुम अमेरिकन हो...

चाइनीज़ गुस्से से....हां मैं अमेरिकन हूं...बस...

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मक्खन...शक्ल से तो बिल्कुल चाइनीज़ लगते हो...
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मुराद पूरी करने वाला कुआं...खुशदीप



कुएं की महत्ता सुनकर एक पति-पत्नी भी वहां गए...

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पति ने कुएं पर झुककर पांच का सिक्का कुएं में डाला और मुराद मांगी...

फिर पत्नी कुएं पर झुकी...कुछ ज़्यादा ही झुकने से उसका बैलेंस बिगड़ गया और वो कुएं में जा गिरी...

पति के मुंह से झट से निकला...

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ओ तेरे की...इट वर्क्स सो फास्ट...
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मक्खन, गुल्ली और चोपड़ा साहब की लड़की...खुशदीप



मक्खन बेटे गुल्ली को डांटते हुए...........................................................................

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बेवकूफ़, जाहिल, चोपड़ा साहब की बेटी को देख, फर्स्ट आई है फर्स्ट...


गुल्ली...डैडी जी, और कितना देखूं उसे....उसे हमेशा देखते रहने की वजह से ही तो फेल हुआ हूं....
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