खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

मक्खन को गुस्सा क्यों आता है...खुशदीप

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  • Khushdeep Sehgal
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  • मक्खन ट्रेन पर यात्रा के लिए निकला...

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    ट्रेन पर चढ़ा...वहां चेतावनी लिखी हुई थी...

    बिना टिकट यात्रा करने वाले होशियार !

    मक्खन....वाह वो होशियार...

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    और हम टिकट लेने वाले क्या हैं...उल्लू के पट्ठे !...

    3 टिप्पणियाँ:

    shikha varshney ने कहा…

    lol....

    Real Matrix ने कहा…

    अब देखते हैं कौन है जो उनको कुछ कह सके ?
    अब हम आ गए हैं मैदान में ऐसे , जिससे सांप भी न मरे और लाठी भी टूट जाए.

    जिस बात को रखना चाहो गुप्त
    उसे मित्रां से भी रखो लुप्त

    सो सॉरी बता न पाएंगे कि हैं कौन हम ?
    परंतु कोई पहचान जाए तो इंकार हम न करेंगे !!!

    http://www.museke.com/love_songs_playlist

    Shah Nawaz ने कहा…

    :-)

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