खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

मक्खन के हाथों में जाम...खुशदीप

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  • Khushdeep Sehgal
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  • मक्खन आज शायरी के मूड में है...



    एक बेवफ़ा की याद में हाथों में जाम उठा लिया...
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    फिर लगाया ब्रेड पे और फटाफट खा लिया...




    नोट- सारे फुके हुए आशिक बेवड़े ही नहीं होते, कुछ भुक्खड़ भी होते हैं....

    1 टिप्पणियाँ:

    अजय कुमार झा ने कहा…

    वाह वाह का कंबीनेशन है ..जियोह्ह रज्जाह

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