खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

मक्खन की तलब और माचिस...खुशदीप

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  • Khushdeep Sehgal
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  • मक्खन के पास सिगरेट तो थी, माचिस नहीं थी...

    बिजली भी नहीं आ रही थी...मक्खन माचिस ढूंढ कर थक गया लेकिन माचिस नहीं मिली...

    बेचारा क्या करता...

    मन  को  किसी तरह मना कर और....

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    मोमबत्ती बुझा कर सो गया...


    1 टिप्पणियाँ:

    संगीता पुरी ने कहा…

    वैसे तो बहुत चतुर है वो .. बस आज गल्‍ती से बेवकूफी हो गयी !!

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