खुशदीप सहगल
बंदा 1994 से पेन-कम्प्यूटर तोड़ रहा है

गुल्ली ने बाप मक्खन के लिए क्या किया...खुशदीप


मक्खन का  बेटा गुल्ली बल्ब पर कुछ लिख रहा था...

मक्खन के दोस्त ढक्कन ने पूछा....बेटा गुल्ली क्या कर रहा है?

गुल्ली...बहुत ज़रूरी काम  कर रहा हूं...चाचा जी....

ढक्कन...क्या ज़रूरी काम बेटा...

गुल्ली...बल्ब पर पापा जी का नाम लिख रहा हूं...

ढक्कन...उससे क्या होगा बेटा...

गुल्ली....ओफ्फो...चाचा जी....इतना  भी नहीं समझते...

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इससे पापा जी का नाम रौशन हो जाएगा ना... बाबा....


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कौन है वो खबीस का बच्चा?


मक्खन का पठान दोस्त अपनी बीवी की कब्र पर पंखा चलाते हुए ज़ोर जोर से रो रहा था...


मक्खन ने हमदर्दी जताई और पूछा....इतनी  मुहब्बत पठान साहब...क्या बात है...


पठान... ओ गोचे...क्या बताती...उसने कहा था...मेरी कब्र की मिट्टी सूखने के बाद ही दूसरा निकाह करना...

मक्खन...ओह ये बात है...

पठान....ओह नहीं  ये बात नहीं होती....बात तो ये होती कि.....


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मैं तो उस खबीस का बच्चा को ढ़ूढती जो रोज़  यहां दो बाल्टी पानी डाल जाती...
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स्कूल क्या होता है?



मक्खन के बेटे गुल्ली से मक्खन के दोस्त ढक्कन का सवाल....

ढक्कन....बताओ बेटा स्कूल कैसी जगह होती  है?

गुल्ली....स्कूल...चाचा जी....हूं...हूं...हूं...स्कूल...

ढक्कन....हां हां बेटे स्कूल...

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गुल्ली....चाचा जी...स्कूल ना...स्कूल ना....स्कूल वो जगह होता है, जहां हमारे पापा को लूटा जाता है और हमें कूटा जाता है....
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